इस पल कुछ बदल रहा होगा

शायद इस पल कुछ बदल रहा होगा
किस्मत की भूल भुलैय्या में कुछ नया चल रहा होगा

उमीदो की सीढियां चदते तो है
अपने अरमानो का भार संभल रहा होगा

क्या जाने अगला मोड़ कौनसा हो
बैचैन ख्याल मन में टहल रहा होगा

इन धुंध की परतों को हटा दो ‘महक’
नयी सुबह में सितारा कही ढल रहा होगा

17 टिप्पणियाँ

  1. anil kant said,

    अप्रैल 16, 2009 at 6:39 पूर्वाह्न

    बहुत ही उम्दा ख़यालात हैं …मुझे बहुत पसंद आये

    मेरी कलम – मेरी अभिव्यक्ति

  2. विनय said,

    अप्रैल 16, 2009 at 6:48 पूर्वाह्न

    कभी कभार ब्लॉग पर नहीं आ पाता, इसके मुआफ़ी चाहूँगा, कई दिनों से काफ़ी काम रहा है! आपकी यह रचना बहुत दिल के क़रीब रही!

  3. अप्रैल 16, 2009 at 7:05 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर भाव!!

  4. अप्रैल 16, 2009 at 7:18 पूर्वाह्न

    इन धुंध की परतों को हटा दो ‘महक’
    नयी सुबह में सितारा कही ढल रहा होगा

    शुभकामनाएं, बहुत सुंदर भाव व्यक्त किये आपने. ” सितारा कहीं ढल रहा होगा” सुंदरतम. बहुत पसंद आये.

    रामराम.

  5. अप्रैल 16, 2009 at 7:50 पूर्वाह्न

    लिखते हैं तेरे पाँव कुरेद कर जमीन पर
    जरूर कहीं कोई दिल पिघल रहा होगा.

    आते हैं जो अल्फाज तुम्हारे ख्यालों में
    हो न हो एक दिल मचल रहा होगा.

  6. अप्रैल 16, 2009 at 8:01 पूर्वाह्न

    शानदार रचना ………लाजवाब ख्याल है …………दिल को छूती हुयी बात

  7. alpana said,

    अप्रैल 16, 2009 at 11:15 पूर्वाह्न

    इन धुंध की परतों को हटा दो ‘महक’
    नयी सुबह में सितारा कही ढल रहा होगा

    Wah!bahut sundar likha hai!

  8. ranju said,

    अप्रैल 16, 2009 at 12:02 अपराह्न

    क्या जाने अगला मोड़ कौनसा हो
    बैचैन ख्याल मन में टहल रहा होगा

    bahut umda khyaal hai ..sundar

  9. Dr Anurag said,

    अप्रैल 16, 2009 at 2:32 अपराह्न

    क्या जाने अगला मोड़ कौनसा हो
    बैचैन ख्याल मन में टहल रहा होगा

    ये ख्याल हमें बड़ा खूब लगा जी…..

  10. rashmi prabha said,

    अप्रैल 16, 2009 at 5:39 अपराह्न

    क्या जाने अगला मोड़ कौनसा हो
    बैचैन ख्याल मन में टहल रहा होगा
    ……..bahut sundar

  11. अप्रैल 16, 2009 at 5:40 अपराह्न

    धूंध की परते हटा कर नये सितारे का ढ़लना देख्नने की ललक का ये अंदाज़ निराला है…

  12. अप्रैल 17, 2009 at 2:52 पूर्वाह्न

    इन धुंध की परतों को हटा दो ‘महक’
    नयी सुबह में सितारा कही ढल रहा होगा !

    These wonderful words are expressing emotive feelings!

  13. अप्रैल 17, 2009 at 7:34 पूर्वाह्न

    और आपकी रचनाएं पढ कर न जाने कौन कौन मचल रहा होगा।
    ———-
    जादू की छड़ी चाहिए?
    नाज्का रेखाएँ कौन सी बला हैं?

  14. musafir jat said,

    अप्रैल 17, 2009 at 12:19 अपराह्न

    महक जी, क्या बात है!!!!

  15. Abhishek said,

    अप्रैल 19, 2009 at 3:43 अपराह्न

    नयी सुबह में सितारा कही ढल रहा होगा….अच्छा लगा, बहुत ही !

  16. अप्रैल 19, 2009 at 5:00 अपराह्न

    बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना!
    आप का ब्लाग बहुत अच्छा लगा।
    मैं अपने तीनों ब्लाग पर हर रविवार को
    ग़ज़ल,गीत डालता हूँ,जरूर देखें।मुझे पूरा यकीन
    है कि आप को ये पसंद आयेंगे।

  17. अप्रैल 20, 2009 at 10:07 पूर्वाह्न

    this time right treck ! a dynamic view point of life is always a handy tool for eternal happiness. I in my previous comment suggested that life is a beautiful journey if one scene changes the other sets in ! keep fingers cross and never forget that every good thing comes to an end to give way to a new good event! best of luck and keep going
    dr vishwas saxena


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