रंगों की बरसात

आसमां से रंगों की बरसात हुई
जमीं से सगाई की बात हुई

शहनाईयां गूंजेंगी वादियों मे
दिल से दिल की मुलाकात हुई

क्षितिज पे इन्द्रधनु सजा ” महक“
दीवानो का घर कायनात हुई

20 टिप्पणियाँ

  1. विनय said,

    अप्रैल 23, 2009 at 4:34 पूर्वाह्न

    महक जी बहुत सुन्दर रचना

  2. alpana said,

    अप्रैल 23, 2009 at 5:21 पूर्वाह्न

    आसमां से रंगों की बरसात हुई
    जमीं से सगाई की बात हुई

    khusburat naya khyal!
    bahut khuub hain teeno sher mahak!
    aaj koi chitr nahin?

  3. अप्रैल 23, 2009 at 6:50 पूर्वाह्न

    क्षितिज पे इन्द्रधनु सजा ” महक“
    दीवानो का घर कायनात हुई

    बहुत लाजवाब और खूबसूरत.

    रामराम.

  4. Digamber said,

    अप्रैल 23, 2009 at 6:51 पूर्वाह्न

    शहनाईयां गूंजेंगी वादियों मे
    दिल से दिल की मुलाकात हुई

    नायाब लिखा है……..महकती हुयी….मीठे एहसास से भरी रचना

  5. अप्रैल 23, 2009 at 7:05 पूर्वाह्न

    अहा. ..क्या बात है.

  6. अप्रैल 23, 2009 at 7:14 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर!!

  7. ranju said,

    अप्रैल 23, 2009 at 7:17 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर लगी रंगों की बरसात

  8. संगीता पुरी said,

    अप्रैल 23, 2009 at 8:27 पूर्वाह्न

    वाह !!

  9. अप्रैल 23, 2009 at 3:46 अपराह्न

    bahut sundar!

  10. rashmi prabha said,

    अप्रैल 24, 2009 at 7:51 पूर्वाह्न

    क्षितिज पे इन्द्रधनु सजा ” महक“
    दीवानो का घर कायनात हुई……….सुन्दर

  11. vijaykumar said,

    अप्रैल 24, 2009 at 10:28 पूर्वाह्न

    mehak ji ,

    kya shaandar likha hai ji .. man prassan ho gaya .. mausam ke apne mijaaj hote hai par in pankhtiyon ne to dilo-dimag par jaadu kar diya hai .. badhai .

    vijay
    http://poemsofvijay.blogspot.com

  12. jayaka said,

    अप्रैल 24, 2009 at 3:46 अपराह्न

    yahn to kavita hi mahak rahi hai, mahakji!…. ati sunder composition!

    aapki preshit shubhechchha ke liye, tahe dil se dhanyawaad!

  13. ShikhaDeepak said,

    अप्रैल 24, 2009 at 4:19 अपराह्न

    बहुत ही सुंदर………

  14. kumarendra said,

    अप्रैल 24, 2009 at 5:37 अपराह्न

    नमस्कार,
    इसे आप हमारी टिप्पणी समझें या फिर स्वार्थ। यह एक रचनात्मक ब्लाग शब्दकार के लिए किया जा रहा प्रचार है। इस बहाने आपकी लेखन क्षमता से भी परिचित हो सके। हम आपसे आशा करते हैं कि आप इस बात को अन्यथा नहीं लेंगे कि हमने आपकी पोस्ट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।
    आपसे अनुरोध है कि आप एक बार रचनात्मक ब्लाग शब्दकार को देखे। यदि आपको ऐसा लगे कि इस ब्लाग में अपनी रचनायें प्रकाशित कर सहयोग प्रदान करना चाहिए तो आप अवश्य ही रचनायें प्रेषित करें। आपके ऐसा करने से हमें असीम प्रसन्नता होगी तथा जो कदम अकेले उठाया है उसे आप सब लोगों का सहयोग मिलने से बल मिलेगा साथ ही हमें भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा। रचनायें आप shabdkar@gmail.com पर भेजिएगा।
    सहयोग करने के लिए अग्रिम आभार।
    कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
    शब्दकार
    रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

  15. sanjiv salil said,

    अप्रैल 24, 2009 at 6:37 अपराह्न

    वन्दना है, प्रार्थना है,
    अर्चना है, साधना है.
    प्यार पूजा-पाठ ‘सलिल’ –
    प्यार ही आराधना है.

  16. Preeti said,

    अप्रैल 25, 2009 at 6:36 अपराह्न

    बहूत ही बखूबी से सगाई, शहनाई और इन्द्रधानुस को सजा दिया आपने महक जी …!

  17. अप्रैल 26, 2009 at 1:55 पूर्वाह्न

    कम शब्दों मन की बात बड़ी चतुराई से चित्रित।
    बहुत सुन्दर!!
    साथ ही कुमारेन्द्र सिंह सेंगर जी को बधाई।
    क्योंकि,
    उन्होंने यह टिप्पणी सभी को भेजी है।

  18. Rewa Smriti said,

    मई 3, 2009 at 8:38 पूर्वाह्न

    क्षितिज पे इन्द्रधनु सजा ” महक“
    दीवानो का घर कायनात हुई

    Hmmm…ham deevane kahenge:

    Ham deevaano ki kya hasti
    hain aaj yahan kal wahan chale…!!

  19. Dr Vishwas Saxena said,

    मई 5, 2009 at 5:55 पूर्वाह्न

    dear author
    at last I found some positive aspect in your poem,no matter it is very theoritical,platonic and full of abstraction.Well anyway now when you have found a positive base spread its fragrance to the world[as your name speaks]
    and take off for a high accomplishing saga which inspires numeruous people known or unknown linked to your poems.Best of luck and Regards.
    Dr Vishwas Saxena


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