ज़िंदगी

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लंबी सी रील के जैसी लगे
मानसपटल के कैमेरे में क़ैद

एक लम्हे का सफ़र ज़िंदगी |

=========================

शायद बहुत कुछ खोया ज़िंदगी
एक बस साया सी, तू  जुदा न हुई

तुझे समझने का मौका ,किस्मतवालो कोही तो मिलता है |

27 टिप्पणियाँ

  1. kalptaru said,

    जुलाई 23, 2009 at 4:04 पूर्वाह्न

    जिंदगी कठिन पहेली जो है !!!

  2. जुलाई 23, 2009 at 4:09 पूर्वाह्न

    क्या बात कही है…!!

  3. जुलाई 23, 2009 at 4:21 पूर्वाह्न

    waah !
    bahut umda …………

  4. रंजन said,

    जुलाई 23, 2009 at 4:25 पूर्वाह्न

    बहुत सही!!!

  5. जुलाई 23, 2009 at 4:50 पूर्वाह्न

    ईश्वर सब को मौका दें !

  6. digamber said,

    जुलाई 23, 2009 at 6:18 पूर्वाह्न

    तुझे समझने का मौका ,
    किस्मतवालो कोही तो मिलता है

    सच कहा….. जिसने जिंदगी को समझ लिया……….. उसने फिर बाजी मार ली, जी लिया हर पल को……….. लाजवाब लिखा है

  7. om arya said,

    जुलाई 23, 2009 at 6:52 पूर्वाह्न

    तुझे समझने का मौका ,
    किस्मतवालो कोही तो मिलता है
    BAHUT HI SAHI HAI KI KISMAT WAALE HI SAMAJHA SAKATE HAI ……SUNDAR RACHANA

  8. ranjit said,

    जुलाई 23, 2009 at 6:59 पूर्वाह्न

    Great and fascinating….

  9. जुलाई 23, 2009 at 7:38 पूर्वाह्न

    वाकई जिंदगी बहुत कठिन पहेली है. जब लगता है कि जिंदगी अब समझ मे आने लग गई है बस वहीं से और ज्यादा उलझ जाती है. शुभकामनाएं.

    रामराम.

  10. rashmi prabha said,

    जुलाई 23, 2009 at 8:06 पूर्वाह्न

    तुझे समझने का मौका ,किस्मतवालो कोही तो मिलता है |
    ….sach hai

  11. Hemant Kumar said,

    जुलाई 23, 2009 at 4:30 अपराह्न

    लंबी सी रील के जैसी लगे
    मानसपटल के कैमेरे में क़ैद

    एक लम्हे का सफ़र ज़िंदगी |

    Bahut khoobsurat aur darshanik panktiyan likhin hai apane jindagee ke bare men……
    HemantKumar

  12. deepakkalel said,

    जुलाई 23, 2009 at 5:56 अपराह्न

    sach kaha
    apaki likhayi dekhakar me prabhavit hua hun
    i wil try to write as your

  13. preeti tailor said,

    जुलाई 24, 2009 at 4:23 पूर्वाह्न

    koshish jindagi ko samjane ki chhod denge ham
    har lamhomen ye khud hi suljegi aur uljegi ,
    har pal ko ji kar ji bharkar
    bas yunhi ek khubsurat tasvir banti hai …..

    bahut kam shabd aur pustak jitni lambi baat

  14. tarushree said,

    जुलाई 24, 2009 at 6:06 पूर्वाह्न

    hmmm Sahi kaha mehak….
    Isi samajhne samajhne me kab jindagi kat jati hai…pata hi nahi chalta na???? mai bhi har roj samajhne me hi bita deti hu….ise jiungi kab pata nahi!!! Badhiya kshanikaein hain…
    tamam umra jindagi ki raho pe…
    tujhe hi kahan khoj paye e jindgi!!

  15. जुलाई 24, 2009 at 3:27 अपराह्न

    कम शब्दों में सधी-बंधी सुंदर अभिव्यक्ती!

  16. दीपक said,

    जुलाई 25, 2009 at 7:12 अपराह्न

    अच्छी रचना। बधाई।

  17. Alpana Verma said,

    जुलाई 26, 2009 at 9:43 पूर्वाह्न

    ‘एक लम्हे का सफ़र ज़िंदगी ‘
    bahut hi sahi baat kahi hai Mahak.
    aaj darshan jhalak raha hai tumhari rachna mein…

  18. Urmi said,

    जुलाई 27, 2009 at 12:43 पूर्वाह्न

    बहुत ही ख़ूबसूरत और उम्दा रचना लिखा है आपने!

  19. जुलाई 27, 2009 at 5:45 पूर्वाह्न

    आपके खूबसूरत शेर पर बधाई!
    एक लम्हे का सफ़र ही है हमारी ज़िंदगी।
    उम्र सारी कट गई पर हो न पाई बन्दगी।।

  20. adwait said,

    जुलाई 27, 2009 at 5:44 अपराह्न

    bahut achchi rachna.

  21. MUKESH said,

    जुलाई 28, 2009 at 9:35 पूर्वाह्न

    khup sundar kavita aahet.

  22. जुलाई 29, 2009 at 12:28 पूर्वाह्न

    ज़िन्दगी को सबने देखा है पर कोइ उसे जान नही पाया। सच कहा आपने। कभी हमने भी कुछ कहने की कोशिश की थी इसके बारे मे, समय मिले तो देखे…

    http://pupadhyay.blogspot.com/2008/12/blog-post_1301.html

  23. muflis said,

    जुलाई 29, 2009 at 12:42 अपराह्न

    लंबी सी रील के जैसी लगे
    मानसपटल के कैमेरे में क़ैद

    एक लम्हे का सफ़र ज़िंदगी |

    itne se alfaaz meiN bahut kuchh
    sachchaa-sa keh diyaa aapne…
    badhaaee . . .
    —MUFLIS—

  24. अगस्त 2, 2009 at 4:40 पूर्वाह्न

    गागर में सागर भर दिया ।

  25. meenu khare said,

    अगस्त 9, 2009 at 4:02 अपराह्न

    लंबी सी रील के जैसी लगे
    मानसपटल के कैमेरे में क़ैद

    एक लम्हे का सफ़र ज़िंदगी |

    आपकी यह रचना मैने आपके नाम का टैग लगा कर अपने ओर्कुट दोस्तों को भेजी है.

  26. karan said,

    दिसम्बर 15, 2010 at 12:03 अपराह्न

    लंबी सी रील के जैसी लगे
    मानसपटल के कैमेरे में क़ैद

    एक लम्हे का सफ़र ज़िंदगी |

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    शायद बहुत कुछ खोया ज़िंदगी
    एक बस साया सी, तू जुदा न हुई

    तुझे समझने का मौका ,किस्मतवालो कोही तो मिलता है |


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