फ़ैसला

woman_beach_sunriseकभी सोचा  थाजिन निगाहों ने तुम्हारे साथ सारी उमर बिताने के ख्वाब देखे , उन्ही
निगाहों से तुम्हे दूर जाते देखेंगे | हमारा ये फ़ैसला सही था या गलत नही पता | मगर उस वक़्त 
जो दिल को महसूस हुआ, हमने वही किया |

आज इतने समय के बाद सोचा, हर नज़रिये से गौर फ़रमाया , और यकीन से कह सकते है ,
हाँ सही फ़ैसला था | नही तुम्हारी वफ़ा में , तुम्हारे वादों में, कोई कमी  थी | सच्चे थे ,दर्पण
की सतह समान उजले | जो दिल में था,वही ज़बान पर | सच कहते है,तुम्हारी कसम , जीतने
सजदे तेरे दर के किये , शायद खुदा के दरगाह पर भी  हुए हमसे |  तुम्हारी ,  हमारी मोहोब्बत 
में कोई कमी थी | फिर भी जुदाई की रस्म अदा करनी पड़ी हमे |

तुम्हारे साथ कायनात की सारी खुशी मिलती हमे, और शायद तुम भी कुछ ऐसा ही महसूस करते
होंगे | जब भी हम दोनो साथ होते, हमारे लिए हम और तुम होते, मगर तुम्हारे लिए सिर्फ तुम |
हम तुम्हे देखते, और तुम अबर को , और वो अंबर हम दोनो को |  हम तीनो साथ साथ तन्हा रहते | झिलमिल सी झील की चन्देरि सतह थी बस | अंदर गहरी खामोशी |

पीछे मुड़कर तुमने कोई सवाल भी  किया था | हाथ छूटे, दिल के राज़ टूटे , इतनो मोहोब्बत करते थे
हमसे , जवाब लिए बिना चले गये | ये फ़ैसला भी तेरी ही खुशी के लिए था……..

हमारे साथ होकर भी , तेरा वो खामोश रहना
तेरा इंतज़ार करने से , बड़ी सजा लगती रही |

25 टिप्पणियाँ

  1. meenu khare said,

    अगस्त 12, 2009 at 6:56 अपराह्न

    हमारे साथ होकर भी , तेरा वो खामोश रहना
    तेरा इंतज़ार करने से , बड़ी सजा लगती रही |

    जीत लिया मन मैड्म.

  2. अगस्त 12, 2009 at 7:38 अपराह्न

    मनोभावों को सुन्दर शब्द दिए हैं। बधाई।

  3. M Verma said,

    अगस्त 12, 2009 at 11:26 अपराह्न

    सुन्दर भावो का प्रवाह. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

  4. अगस्त 13, 2009 at 2:10 पूर्वाह्न

    कभी सोचा न था, जिन निगाहों ने तुम्हारे साथ सारी उमर बिताने के ख्वाब देखे , उन्ही
    निगाहों से तुम्हे दूर जाते देखेंगे

    किनती बड़ी बात, कितनी सहजता से कह दी आपने….ह्रदय की अनुभूतियाँ कई बार शब्दों में यूँ उतर आती हैं कि लगता हैं कोई अपनी ही बात कर रहा हैं। साधू!

  5. अगस्त 13, 2009 at 2:51 पूर्वाह्न

    आपकी रचनाएं बिल्कुल सतसैया के दोहरे जैसी होती हैं. बहुत गहरा भाव व्यक्त करती हैं. शुभकामनाएं.

    रामराम.

  6. preeti tailor said,

    अगस्त 13, 2009 at 3:54 पूर्वाह्न

    fir ek baar bada hi dischasp aur sachcha khayal ….aise faisle hamari jindagike behtarin sansmaran ban jaate hai ….

    bahut badhai

  7. seema gupta said,

    अगस्त 13, 2009 at 5:03 पूर्वाह्न

    हमारे साथ होकर भी , तेरा वो खामोश रहना
    तेरा इंतज़ार करने से , बड़ी सजा लगती रही |

    ” mind blowing and emotional expression..”

    regards

  8. om arya said,

    अगस्त 13, 2009 at 6:13 पूर्वाह्न

    bahut hi khub ….

  9. rashmi prabha said,

    अगस्त 13, 2009 at 7:54 पूर्वाह्न

    kitni gahri soch hai,par apni hai…..samnewale ki soch kya yahi thi?

  10. mehek said,

    अगस्त 13, 2009 at 8:12 पूर्वाह्न

    rashmi ji kabhi kabhi hum samnewale ko itana jaanane lagte hai,ke unki khamoshiya bhi humse baatein karti hai, hai na, dil ka wada aur mann ke iradon mein kabhi kashmakash ho tab…sunahare haqiqat ke liye,iradon ko dil ke wadon se jyada tawajo dene ki koshish bhar ki hai.

    vaise samnewale ko rukna hota,tho na manta nayika ka faisla….ruk jaata ,sada ke liye.baat magar hai sahi ye bas nayika ka nazariya hai,nayak yaha bada khamoshhi raha.

    aap bhi ka bahut shukran

  11. विनय said,

    अगस्त 13, 2009 at 8:49 पूर्वाह्न

    दरिया है मन भावनाओं का

  12. digamber said,

    अगस्त 13, 2009 at 8:57 पूर्वाह्न

    हमारे साथ होकर भी , तेरा वो खामोश रहना
    तेरा इंतज़ार करने से , बड़ी सजा लगती रही

    Vaah ….seedha man mein utar gayee……kya pata kya majboori ho jo piche mud kar bhi koi sawaal n kiya….par hum dono jaante hain ki koi bhi bewafa nahi….. aapka likha kisi dosri duniya mein jabran le jaata hai….. lajawaab

  13. AMITABH MEET said,

    अगस्त 13, 2009 at 9:55 पूर्वाह्न

    हमारे साथ होकर भी , तेरा वो खामोश रहना
    तेरा इंतज़ार करने से , बड़ी सजा लगती रही |

    bahut khoob.

  14. darbhangiyag said,

    अगस्त 13, 2009 at 12:10 अपराह्न

    पिछले कुछ दिनों से व्यस्त था सो आपका लिखा पढ़ नहीं पाया.

    बहुत सुन्दर.

  15. rakesh singh said,

    अगस्त 13, 2009 at 3:33 अपराह्न

    हमारे साथ होकर भी , तेरा वो खामोश रहना
    तेरा इंतज़ार करने से , बड़ी सजा लगती रही |

    मन को छू गया |

  16. mithilesh dubey said,

    अगस्त 13, 2009 at 6:15 अपराह्न

    मनोभावों को सुन्दर शब्द दिए हैं। बधाई।

    कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामना और ढेरो बधाई .

  17. अगस्त 14, 2009 at 2:51 पूर्वाह्न

    बहुत बढ़िया।
    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

  18. Urmi said,

    अगस्त 14, 2009 at 5:07 पूर्वाह्न

    अत्यन्त सुंदर! श्री कृष्ण जनमाष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें!

  19. ranju said,

    अगस्त 14, 2009 at 5:50 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत बधाई

  20. अगस्त 14, 2009 at 10:16 पूर्वाह्न

    हमारे साथ होकर भी , तेरा वो खामोश रहना
    तेरा इंतज़ार करने से , बड़ी सजा लगती रही
    wah wah kya kaha hai aapne .
    par ye aap ke sath hua hai ya yu hi
    aapne bhawnaao me bah kar likh diya

  21. विनय said,

    अगस्त 14, 2009 at 12:52 अपराह्न

    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
    —-
    INDIAN DEITIES

  22. अगस्त 14, 2009 at 1:32 अपराह्न

    मैंने एक बार कहीं पढ़ा था..
    “Friend is someone whom you can be silent with….”

  23. Poonam said,

    अगस्त 14, 2009 at 2:28 अपराह्न

    हमारे साथ होकर भी , तेरा वो खामोश रहना
    तेरा इंतज़ार करने से , बड़ी सजा लगती रही |

    bahut khoobsurat abhivyakti….svatantrata divas kee dheron shubhkamnayen.
    Poonam

  24. abdulhai said,

    अगस्त 14, 2009 at 6:36 अपराह्न

    हमारे साथ होकर भी , तेरा वो खामोश रहना
    तेरा इंतज़ार करने से , बड़ी सजा लगती रही |

  25. Tosha said,

    अगस्त 15, 2009 at 2:51 पूर्वाह्न

    Nicely written and Beautifully woven thoughts.

    हिन्दी मैं बोलूं तो:
    उत्तम रचना और घनिष्ट विचार!!🙂


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