खबर

कोई कह दे इन हवाओं से
के यू बुदबुदाया ना करे

वक़्त ही कितना लगता है खबर उड़ जाने के लिए

24 टिप्पणियाँ

  1. Urmi said,

    सितम्बर 2, 2009 at 4:18 पूर्वाह्न

    वाह क्या बात है! चंद पंक्तियों में आपने सच्चाई का ज़िक्र किया है! बहुत बढ़िया लगा!

  2. om arya said,

    सितम्बर 2, 2009 at 5:22 पूर्वाह्न

    बहुत ही सही कहा चन्द पंक्तियो मे …………….बधाई

  3. limit said,

    सितम्बर 2, 2009 at 6:02 पूर्वाह्न

    वक़्त ही कितना लगता है खबर उड़ जाने के लिए

    सुन्दर अभिव्यक्ति
    regards

  4. arshia said,

    सितम्बर 2, 2009 at 7:08 पूर्वाह्न

    Lajawaab kar diya aapne.
    ( Treasurer-S. T. )

  5. digamber said,

    सितम्बर 2, 2009 at 7:31 पूर्वाह्न

    VAAH ….. क्या बात LIKHI है …… 2 LAINO में सब कुछ कह दिया …. KAMAAL …….

  6. rashmi prabha said,

    सितम्बर 2, 2009 at 7:54 पूर्वाह्न

    are waah……kya andaaj hai

  7. सितम्बर 2, 2009 at 10:10 पूर्वाह्न

    क्या बात है दो शव्दो मे सारी हकीकत व्यान कर दी.
    धन्यवाद

  8. सितम्बर 2, 2009 at 10:34 पूर्वाह्न

    सच!!

    वाह!!

  9. सितम्बर 2, 2009 at 11:17 पूर्वाह्न

    कोई कह दे इन हवाओं से
    के यू बुदबुदाया ना करे

    वक़्त ही कितना लगता है खबर उड़ जाने के लिए
    वाह,कम शब्दो मे कितना कुछ कह दिया आपने

  10. सितम्बर 2, 2009 at 6:08 अपराह्न

    अब क्या कहें….लाजबाव.

  11. apoorv said,

    सितम्बर 2, 2009 at 6:19 अपराह्न

    खुद हवाओं के परों पर सवार होती हैं खबरें..
    उम्दा!

  12. rohit said,

    सितम्बर 2, 2009 at 11:39 अपराह्न

    Mehak

    वक़्त ही कितना लगता है खबर उड़ जाने के लिए
    Wah Kia Baat Hia ….. Per aaj aisha nahi hai mehak…khabar ud nahi rahi hai..mil nahi rahi haii……yaha to intzaar ka gana gaa rahe hai hum…

    andra ke CM jungle me kho gaye hai … or unke intzaar me hum office me ruke gaye hai….khabar aaye to kuch kare….hai re hai….16 ghunte ke duty…..news channle me kaam karna bhi … khabar ke intzaar me …..

    early morning ke 5 baje hai…

  13. सितम्बर 3, 2009 at 1:31 पूर्वाह्न

    खूबसूरती से कहा गया सम्पुट ! आभार ।

  14. dr t s daral said,

    सितम्बर 3, 2009 at 9:57 पूर्वाह्न

    वह, क्या खूब लिखा है. गागर में सागर

  15. anil kant said,

    सितम्बर 3, 2009 at 10:54 पूर्वाह्न

    अच्छी बात लिखी है आपने

  16. raj said,

    सितम्बर 3, 2009 at 11:09 पूर्वाह्न

    वक़्त ही कितना लगता है खबर उड़ जाने के लिए..kya khoob kaha sahi me waqat hi kitna lagta hai…

  17. सितम्बर 3, 2009 at 2:20 अपराह्न

    तीन पंक्तियों में कमाल कर दिया. कविता की यही खूबसूरती बरकरार रहनी चाहिए.
    और ये कमेन्ट बक्स के ऊपर ‘हैरान परेशान’ को इतना आदर किस लिए दिया जा रहा है?

  18. सितम्बर 3, 2009 at 2:27 अपराह्न

    महक, आपने कविता की इतनी अच्छी महक फैलाई है की उसका असर काफी देर तक बना रहेगा. लेकिन यही तेवर बने रहें. आपको बहुत लम्बा सफर तय करना है. इस नन्ही सी पोएट्री के लिए शुभकामना.

  19. hemant kumar said,

    सितम्बर 4, 2009 at 3:22 पूर्वाह्न

    खबरों का क्या है …..?
    परिन्दे हैं
    उड़ ही जाया करते हैं……!
    बेहतरीन ..!
    आभार…..।

  20. Rewa Smriti said,

    सितम्बर 5, 2009 at 4:41 पूर्वाह्न

    Waqt ka ye parinda ruka hai kahan…?

  21. सितम्बर 6, 2009 at 8:15 पूर्वाह्न

    वाह, कही पढा था कि बडी चीजे छोटे पैकेट मे आती है, अभी देख भी लिया…वाह महक जी, कत्ल🙂

  22. preeti tailor said,

    सितम्बर 7, 2009 at 4:17 पूर्वाह्न

    bina pankh jaise baat ud rahi havamen aur bin kahe koi kah gaya sabkuchh

  23. Mahfooz said,

    सितम्बर 8, 2009 at 5:42 पूर्वाह्न

    वक़्त ही कितना लगता है खबर उड़ जाने के लिए

    sahi kah rahinhain aap……… waqt hi kitna lagta hai,,,,……….. khabar ud jaane mein……..
    khoobsoorat………

  24. सितम्बर 13, 2009 at 2:26 अपराह्न

    खूबसूरत अंदाज…हमेशा की तरह


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