खयाल

अरसा हुआ अलग है हमारी राहें

और हासिल कर ली हमने अपनी अपनी मंज़िले

खुशियों की तितलियाँ हमारे आंगन उड़ती है

तेरी यादे भी कोहरे में घुल गयी

फिर तन्हा लम्हो में क्यों

दिल को एक खयाल सताता है

के तेरे लबों पर अब भी कभी

क्या हमारा नाम आता है ?

27

31 टिप्पणियाँ

  1. Dr Anurag said,

    सितम्बर 4, 2009 at 6:02 पूर्वाह्न

    सवाल जायज है …..सोच भी…कभी मैंने भी इसी सवाल पे एक त्रिवेणी लिखी थी…..

  2. सितम्बर 4, 2009 at 6:09 पूर्वाह्न

    दिल को एक खयाल सताता है

    के तेरे लबों पर अब भी कभी

    क्या हमारा नाम आता है ?
    बहुत सुंदर…. एक बात बताऊ नाम भूला ही कहा होगा….. जरुर आता होगा

  3. rashmi prabha said,

    सितम्बर 4, 2009 at 8:39 पूर्वाह्न

    aisa bhi hota hai

  4. digamber said,

    सितम्बर 4, 2009 at 8:42 पूर्वाह्न

    ISLIYE TO KAHTE HAIN ………… YAAD KAHEEN NA KAHEEN DIL KE KONE MEIN DABI RAHTI HAIN ……….. TANHAAI MEIN CHUPKE SE CHALI AATI HAIN …….

  5. सितम्बर 4, 2009 at 9:19 पूर्वाह्न

    बहुत खूबसूरत सवाल. शुभकामनाएं.

    रामराम.

  6. सितम्बर 4, 2009 at 11:13 पूर्वाह्न

    बहुत प्यारा ख्याल है।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  7. om arya said,

    सितम्बर 4, 2009 at 11:22 पूर्वाह्न

    कई बार आती तो होगी पर समय का रुख साथ नही देता होगा ………..आती तो है ………..बहुत ही खुब…..जायज है सवाल

  8. archana said,

    सितम्बर 4, 2009 at 1:04 अपराह्न

    अति सुंदर ख़्याल…

  9. hemant kumar said,

    सितम्बर 5, 2009 at 12:58 पूर्वाह्न

    गुलाम अली ने गजल गायी है—
    तू कही भी रहे सर पे तेरे इल्जाम तो है……।
    आभार ।

  10. vani geet said,

    सितम्बर 5, 2009 at 1:58 पूर्वाह्न

    हम तो सोचे थे भूल गए वो हमको हम उनको
    खयालो में फिर दबे पांव दस्तक किसकी है …!!

  11. K.VERMA said,

    सितम्बर 5, 2009 at 3:15 पूर्वाह्न

    bahut badhiya likha hai

    meribhisuno

  12. Rewa Smriti said,

    सितम्बर 5, 2009 at 4:40 पूर्वाह्न

    Beautiful!

  13. Ravi said,

    सितम्बर 5, 2009 at 5:12 पूर्वाह्न

    Bahut acha likhte ho aap
    techtricx

  14. विनय said,

    सितम्बर 5, 2009 at 11:59 पूर्वाह्न

    beautiful

  15. K.VERMA said,

    सितम्बर 5, 2009 at 3:09 अपराह्न

    teri yaden bhi kuhre me ghul gayin..kya bat hai .

  16. सितम्बर 6, 2009 at 5:20 पूर्वाह्न

    दिल तो पागल है । खैर ,कोई बात नहीं ।
    अच्छा लिखा है ।
    साधुवाद !

  17. utsahi said,

    सितम्बर 7, 2009 at 4:04 पूर्वाह्न

    तुम्‍हारी याद

    अमरबेल सी

    छा जाती है
    और चूसते रहती है

    धीरे-धीरे

  18. preeti tailor said,

    सितम्बर 7, 2009 at 4:19 पूर्वाह्न

    gum hai is khayal men adhkhuli aankhonke
    bas ek dastak dedo aur hamen jaga jaao ….

  19. सितम्बर 7, 2009 at 1:10 अपराह्न

    महक जी खूबसूरत भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति

  20. apoorv said,

    सितम्बर 7, 2009 at 6:20 अपराह्न

    वाह..कम्बख्त यही तो वह कश्मकश है जो न जीने देती है..न मरने देती है!!
    बेहतरीन पंक्तियाँ..बधाई

  21. Urmi said,

    सितम्बर 8, 2009 at 1:17 पूर्वाह्न

    बहुत ही सुंदर और प्यारा ख्याल है! अत्यन्त सुंदर रचना!
    मेरे नए ब्लॉग पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

  22. सितम्बर 8, 2009 at 5:30 पूर्वाह्न

    फिर तन्हा लम्हो में क्यों

    दिल को एक खयाल सताता है

    के तेरे लबों पर अब भी कभी

    क्या हमारा नाम आता है ?
    वाह!!!क्या ऊलझन में डाल दिया है आपने!!! सुंदर रचना!!बधाई।

  23. Mahfooz said,

    सितम्बर 8, 2009 at 5:46 पूर्वाह्न

    के तेरे लबों पर अब भी कभी

    क्या हमारा नाम आता है ?

    raahen bhale hi juda ho jaaayen…….. par har pal naam to zehen mein rehta hi hai……… jo gaahe bagaahe zubaan pe bhi aa hi jata hai……

  24. Deepali said,

    सितम्बर 8, 2009 at 5:02 अपराह्न

    bahut khoobsurat nazm .. khoobsurat khayaalon ke liye badhai

  25. Mahfooz said,

    सितम्बर 9, 2009 at 1:17 पूर्वाह्न

    main aapke blog ko follow karna chah raha tha…… option hi nahin hai….. mujhe zara bataiyega…… ki main kaise follow karoon…..

    Thanx!

    Regards………

  26. सितम्बर 9, 2009 at 1:33 पूर्वाह्न

    हमें तो यही था गुरुर ग़मे यार है हमसे दूर
    वही ग़म जिसे हमने किस किस जतन से
    निकाला था इस दिल से दूर
    वो चल कर क़यामत कि चाल आ गया……

  27. mehek said,

    सितम्बर 9, 2009 at 2:55 पूर्वाह्न

    well i dont hv any idea about how to follow wordpress blogs.

  28. Alpana Verma said,

    सितम्बर 9, 2009 at 8:48 अपराह्न

    आखिर में बड़ा ही मासूम सा सवाल पूछ लिया…:)

  29. rakeshkoshi said,

    सितम्बर 10, 2009 at 4:35 पूर्वाह्न

    क्य वास्तव मे तुमने मन्जील पाली है


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