कैसे इस दिल से

कैसे इस दिल से तुझे भुला दे हम
तेरे नाम के लय पर तो धड़कन चलती है |

14 टिप्पणियाँ

  1. सितम्बर 12, 2009 at 3:52 पूर्वाह्न

    कैसे इस दिल से तुझे भुला दे हम
    तेरे नाम के लय पर तो धड़कन चलती है |

    bilkul ye bhala kaise ho sakta hai ji !!!!

  2. seema gupta said,

    सितम्बर 12, 2009 at 3:53 पूर्वाह्न

    सुन्दर अभिव्यक्ति

    regards

  3. सितम्बर 12, 2009 at 5:47 पूर्वाह्न

    सुन्दर बधाई

  4. rashmi prabha said,

    सितम्बर 12, 2009 at 7:31 पूर्वाह्न

    waah…….

  5. preeti tailor said,

    सितम्बर 12, 2009 at 7:47 पूर्वाह्न

    bilkul

  6. सितम्बर 12, 2009 at 8:11 पूर्वाह्न

    वाह बहुत सुंदर. शुभकामनाएं.

    रामराम.

  7. सितम्बर 12, 2009 at 8:19 पूर्वाह्न

    बूँद में सागर का मुहावरा आपने सच कर दिखाया है. लेकिन ये छुटभैये कब तक चलेंगे?

  8. shama said,

    सितम्बर 12, 2009 at 8:23 पूर्वाह्न

    Padh ke meree to dhadkane ruk-see gayeen…

  9. Mahfooz said,

    सितम्बर 12, 2009 at 6:44 अपराह्न

    hum waaqai mein kisi ko bhula nahi sakte hain……. chahe kuch bhi ho jaye….. agar hum kisi ko bhool hi jayen…… to iska matlab yahi hai ki pyar tha hi nahi kabhi…………..

    bahut hi khoobsoorat lines hain…..

    Mehek ji …… maine bhi ek kavita likhi hai….. ki mere shabd kho gaye hain…….

    dekhiyega……..

    http://www.lekhnee.blogspot.com

    Regards……..

  10. shama said,

    सितम्बर 14, 2009 at 11:34 पूर्वाह्न

    ये फ़िल्म मैंने भी देखी थी( साथ एक ब्लॉगर , भी थीं) …अनेक कुर्बानियाँ दी गयीं …शायद एक बात कईयों को पता नही …सावरकर अंग्रेज़ी हुकूमत से माफी माँग, जेल से निकल आए थे ..महाराष्ट्र में इस बात की कोई पुश्टी नही करेगा …उनकी काव्य रचनाएँ बेहद सुंदर हैं ( ने मजशी ने ,परत मात्रु भूमीला ,सागर प्राण …: अए समंदर मुझे, तू ही अपनी मात्रु भूमी पे वापस ले जा…प्राण तड़प गए हैं…. इस रचना को एक आशा भासले छोड़, पूरे मंगेशकर परिवार ने गया है)। लेकिन गांधी , नेहरू , पटेल , आज़ाद …और अन्य सैकडों,…इनकी बराबरी शायद ही सावरकर कर सकते हैं ….ये ऐतिहासिक सच है ..

  11. om arya said,

    सितम्बर 14, 2009 at 11:36 पूर्वाह्न

    बेहद ही खुबसूरत बातो को दिखाया अपने पोस्ट के माध्यम से …………बहुत ही सुन्दर .

  12. shama said,

    सितम्बर 14, 2009 at 11:36 पूर्वाह्न

    ये फ़िल्म मैंने भी देखी थी( साथ एक ब्लॉगर , भी थीं) …अनेक कुर्बानियाँ दी गयीं …शायद एक बात कईयों को पता नही …सावरकर अंग्रेज़ी हुकूमत से माफी माँग, जेल से निकल आए थे ..महाराष्ट्र में इस बात की कोई पुश्टी नही करेगा …उनकी काव्य रचनाएँ बेहद सुंदर हैं ( ने मजशी ने ,परत मात्रु भूमीला ,सागर प्राण …: अए समंदर मुझे, तू ही अपनी मात्रु भूमी पे वापस ले जा…प्राण तड़प गए हैं…. इस रचना को एक आशा भासले छोड़, पूरे मंगेशकर परिवार ने गया है)। लेकिन गांधी , नेहरू , पटेल , आज़ाद …और अन्य सैकडों,…इनकी बराबरी शायद ही सावरकर कर सकते हैं ….ये ऐतिहासिक सच है ..
    mai jahan copy/paste karna chaah rahee hun, us aalekh ke tahat ho nahee raha..pata nahee kyon?

  13. abdu hai said,

    सितम्बर 16, 2009 at 6:00 अपराह्न

    bahut hi sunder

  14. सितम्बर 17, 2009 at 1:09 पूर्वाह्न

    अच्छी प्रस्तुति….बहुत बहुत बधाई…
    मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग “मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी”में पिरो दिया है।
    आप का स्वागत है…


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