जो चली इश्क़ की पुरवाई

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जो चली इश्क़ की पुरवाई
सिंदूरी शाम हौले मुस्कुराई

इस अदब से बाहों में कैद किया
खिली रजनीगंधा ,महकी शरमाई

रौशनी से अंबर जगमगा उठा
बड़े शौक से हर चाँदनी झिलमीलाई

मिलन की बेला , दो दिल जुड़े
सारी कायानात में गूंजी शहनाई …

25 टिप्पणियाँ

  1. rashmi prabha said,

    सितम्बर 17, 2009 at 7:39 पूर्वाह्न

    aur swar gunje …….badhaai ho badhaai……
    bahut badhiyaa

  2. anil kant said,

    सितम्बर 17, 2009 at 8:10 पूर्वाह्न

    मुझे रचना अच्छी लगी

  3. सितम्बर 17, 2009 at 9:28 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर. शुभकामनाएं.

    रामराम

  4. om arya said,

    सितम्बर 17, 2009 at 9:58 पूर्वाह्न

    मिलन की बेला , दो दिल जुड़े
    सारी कायानात में गूंजी शहनाई

    वाह क्या कहूँ ………. बहुत ही सुन्दर है आपकी रचना ……दिल को छू गयी…धन्यावाद

  5. M Verma said,

    सितम्बर 17, 2009 at 10:06 पूर्वाह्न

    मिलन की बेला , दो दिल जुड़े
    सारी कायानात में गूंजी शहनाई …
    जी हाँ मिलन की बेला मे तो सारी कायनात ही गूँज उठती है.
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

  6. kshama said,

    सितम्बर 17, 2009 at 10:52 पूर्वाह्न

    Phir ek ‘mahektee ‘ huee nazm..sunayee dee shahnaee ke saath..tan-badan chhoo gayee purwaee ke saath..

  7. digamber said,

    सितम्बर 17, 2009 at 11:07 पूर्वाह्न

    SACH KAHA JAB ISHQ KI HAVA CHALTI HAI TO SAARA JAHAA MAHAKTA HAI …..SHAHNAAI BAJNE LAGTI HAI ……..

  8. ranju said,

    सितम्बर 17, 2009 at 12:21 अपराह्न

    अच्छी लगी आपकी यह रचना महक ..

  9. सितम्बर 17, 2009 at 1:33 अपराह्न

    बहुत सुंदर.
    धन्यवाद

  10. pallavi trivedi said,

    सितम्बर 17, 2009 at 2:25 अपराह्न

    इस अदब से बाहों में कैद किया
    खिली रजनीगंधा ,महकी शरमाई

    ye lines bahut pyari hai…..

  11. सितम्बर 17, 2009 at 3:44 अपराह्न

    बहुत सुंदर.

  12. सितम्बर 17, 2009 at 6:56 अपराह्न

    सुन्दर मोहक प्रस्तुति!

  13. Mahfooz said,

    सितम्बर 17, 2009 at 7:49 अपराह्न

    जो चली इश्क़ की पुरवाई
    सिंदूरी शाम हौले मुस्कुराई

    haan! yeh to hai…… jab ishq ki hawa chalti hai, to shaam bhi kuch namkeen aur khushnuma lagti hai…

    इस अदब से बाहों में कैद किया
    खिली रजनीगंधा ,महकी शरमाई

    baat to sahi hai…. jab baahon mein qaid hi kiya hai to…….. khushbu to kasmasayegi hi…….

    रौशनी से अंबर जगमगा उठा
    बड़े शौक से हर चाँदनी झिलमीलाई

    chaandni to har pal jhilmilaati hi hai…. qki nazar jo nahi mila paati….

    मिलन की बेला , दो दिल जुड़े
    सारी कायानात में गूंजी शहनाई

    yeh to ultimate hai hi…. happy ending………

    yeh poori kavita mujhe itni achchi lagi ki …. mere paas shabd nahi hai…….. appraisal ke liye…….. ab jab shabd nahi hai…… to meri or se yahi remuneration aur reward hai is kavita ke liye……..

    hats off to u………

    AA+++++++++

    Regards………

  14. Mahfooz said,

    सितम्बर 17, 2009 at 7:51 अपराह्न

    Mummyji (Rashmi Prabhaji)…….. ne ek dum sahi kaha……badhaai ho badhaai……

  15. apoorv said,

    सितम्बर 17, 2009 at 8:00 अपराह्न

    इश्क़ की चाशनी मे सराबोर रचना के लिये बधाई..वैसे अन्यथा न ले तो इससे भी कई बेहतर रचनाऎं पढ़ने को मिली आपके ब्लॉग पर..
    वैसे यह पंक्तियाँ मधुर रहीं..

    मिलन की बेला , दो दिल जुड़े
    सारी कायानात में गूंजी शहनाई …
    बिसमिल्ला खाँ साहब की याद दिला दी.

  16. alpana verma said,

    सितम्बर 17, 2009 at 9:00 अपराह्न

    मिलन की बेला , दो दिल जुड़े
    सारी कायानात में गूंजी शहनाई
    waah! kya rumani rachna hai.
    Mahak si mahakti!

  17. सितम्बर 18, 2009 at 7:34 पूर्वाह्न

    Mehak Ji,

    जो चली इश्क़ की पुरवाई
    सिंदूरी शाम हौले मुस्कुराई

    इस अदब से बाहों में कैद किया
    खिली रजनीगंधा ,महकी शरमाई

    Chhoti magar bahut hi pyari rachna .. man ko bha gayi …Surinder

  18. Dr Anurag said,

    सितम्बर 18, 2009 at 7:53 पूर्वाह्न

    aaj mood behtar hai aapka

  19. shekhar said,

    सितम्बर 18, 2009 at 8:30 पूर्वाह्न

    darde tanhayee me aaj ye dil gaata hai
    yaadon ki kaarwan me koi aata hai
    suni rahon me nazre dhoond rahi hai use
    jo mujhe aaj bhi roolata hai

  20. सितम्बर 18, 2009 at 9:52 पूर्वाह्न

    “इस अदब से बाहों में कैद किया…” ये पंक्ति अच्छी बन पड़ी है।

  21. सितम्बर 18, 2009 at 5:02 अपराह्न

    जो चली इश्क़ की पुरवाई
    सिंदूरी शाम हौले मुस्कुराई

    इस अदब से बाहों में कैद किया
    खिली रजनीगंधा ,महकी शरमाई

    Sundar panktiyan, man ko bha gayi…

  22. सितम्बर 18, 2009 at 7:36 अपराह्न

    अच्छी प्रस्तुति….बहुत बहुत बधाई…
    मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग “मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी “में पिरो दिया है।
    आप का स्वागत है…

  23. preeti tailor said,

    सितम्बर 22, 2009 at 6:49 पूर्वाह्न

    ek hi labz…. laajavaab….

  24. ashish said,

    जून 12, 2010 at 5:54 पूर्वाह्न

    waw ………….ye isk ki purvai badi badi mithi lagti hai………….

  25. komal thakre said,

    मार्च 5, 2014 at 7:32 पूर्वाह्न

    Bhot khub kha h
    kyoki
    isk chij hi aisi hoti h


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