मीना बाज़ार

बाज़ार बहुत होते है, मगर मीना बाज़ार की अपनी ही खासियत होती है | हर साल रमज़ान के महीने में लगता है |
इसकी रौनक ही कुछ और रहती है | खूबसूरत नकाशी किए हुए ग्लास , डिन्नर सेट , उम्दा सूखे मेवे ,महेंगे
खुशबूदार इत्र | मुस्कुराते खरीदारी करते चेहरे ,हंसी ठिठोली , माहोल को और भी खुशनुमा कर देते है |

हमे वहा जाना ,घूमना बेहद पसंद है | सूखे मेवे और बाकी चीज़े तो खरीद लेते ही है,मगर हमारा निशाना
होता है , इत्तर की बोतलों पर, और खूब सारी रंग बिरंगी चूड़ियों की गाड़ियों पर | शर्त लगाए कह सकते है ,
शहर की बड़े से बड़ी दुकान में भी इतनी खूबसूरत चूड़ियाँ नही मिलती | हर बारी के पाँच ,छे, डजन चूड़ियाँ
खरीद लाते है | अब बड़ी दुकान में होता है फिक्स्ड रेट | और हमे जब तक चूड़ीवाले से तोल मोल भाव के लिए
थोड़ी झिक् झिक् न हो,चूड़ी खरीदने का आनंद ही नही मिलता |

ईद आने को है और अब तक हमारा जाना नही हुआ, कल कोई भी हालत में चूड़ियाँ लेने जाएंगे | खुदाने
चूड़ियों का शौक दिया,मगर चूड़ियाँ पहनने के मौके बहुत कम | साल मे दो या तीन बार बस,त्योहारों पर ही
कोहनी तक भर भर चूड़ियाँ पहनने मिल जाती है | रोज़मर्रा की ज़िंदगी में चाह कर भी ,एक चूड़ी नही पहन सकते |
बार बार ग्लोव पहनो,उतारो, आधे से उपर दिन रात खून से भरे हाथ , चूड़ियों के लिए तरस जाते है | बस किसी पेशेंट,
या किसी राह चलती औरत के हाथों की चूड़ियों की खनक से ही दिल बहला लेते है |

6 टिप्पणियाँ

  1. sharad kokas said,

    सितम्बर 18, 2009 at 7:47 अपराह्न

    अब गुम होती जा रही है वह चूड़ियों की खनक की आवाज़ .और कितना शोर फैल गया है आसपास .. वो खिलखिला कर हँसने की आवाज़ें .. और सहेलियों के बीच फुसफुसाहट .. ज़िन्दगी मे मसरूफियत तो चलती रह्ती है मोहतरमा ..लेकिन आप इस ईद पर कोहनी भर चूड़ियाँ पहनिये और खुश होकर ईद मनाइये.. यह ईद और आनेवाली सभी ईद ..ईद मुबारक – आपका शरद कोकास दुर्ग छ. ग. और हाँ मेरी नन्ही बिटिया कोपल कैसे रमज़ान और ईद मनाती है देखना न भूलें यहाँ

  2. M Verma said,

    सितम्बर 18, 2009 at 11:27 अपराह्न

    खो रहे है पारम्परिक स्वरूप —
    “थोड़ी झिक् झिक् न हो,चूड़ी खरीदने का आनंद ही नही मिलता |”
    बेहतरीन अभिव्यक्ति है.

  3. सितम्बर 19, 2009 at 2:42 पूर्वाह्न

    सही कहा…अच्छा लगा आलेख.

  4. सितम्बर 19, 2009 at 2:58 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर! आलेख में जीवन का कंट्रास्ट उभर आया है।

  5. preeti tailor said,

    सितम्बर 22, 2009 at 6:51 पूर्वाह्न

    aurat ki pahchaan hai ….


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: