खुद को देख रहे

imagesखुद को देख रहे
आईनें में इस कदर
वो अजनबी शक्स वहा
बैठा अंदर कौन
दावे बहुत किया करते
खुद से वाकिफ है

 आज राह देख रहे
उस अक्स से हमे भी

 कोई रूबरू करा दे…….

23 टिप्पणियाँ

  1. Pankaj said,

    सितम्बर 26, 2009 at 6:03 पूर्वाह्न

    बढ़िया लिखा है आपने

  2. Mahfooz said,

    सितम्बर 26, 2009 at 6:07 पूर्वाह्न

    आज राह देख रहे
    उस अक्स से हमे भी

    कोई रूबरू करा दे…

    yeh line bahut badhiya lagi………

    thnx for sharing…..

  3. Mahfooz said,

    सितम्बर 26, 2009 at 6:08 पूर्वाह्न

    आज राह देख रहे
    उस अक्स से हमे भी

    कोई रूबरू करा दे…

    yeh line bahut badhiya lagi………

    thnx for sharing…..

  4. Mahfooz said,

    सितम्बर 26, 2009 at 6:10 पूर्वाह्न

    maine ek sawaal kiya hai apne blog pe ………..U r requested to participate in…

  5. सितम्बर 26, 2009 at 6:41 पूर्वाह्न

    वाह महक जी दो शब्दों मे इतना कुछ कह दिया बहुत बडिया शुभकामनायें

  6. M Verma said,

    सितम्बर 26, 2009 at 7:18 पूर्वाह्न

    महक जी
    अत्यंत खुश्बूदार रचना.
    सुन्दर एहसास और अभिव्यक्ति

  7. ranju said,

    सितम्बर 26, 2009 at 8:01 पूर्वाह्न

    बहुत खूब ..पर उस अक्स से रूबरू होना ही मुश्किल लगता है ..हर पल रूप बदलता है वो ..बहुत अच्छी लगी आपकी यह रचना शुक्रिया

  8. Arshia said,

    सितम्बर 26, 2009 at 8:19 पूर्वाह्न

    कम लफजो में तमाम बातें कहना कोई आपसे सीखे।
    —–
    दुर्गा पूजा एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    ( Treasurer-S. T. )

  9. hemant kumar said,

    सितम्बर 26, 2009 at 8:21 पूर्वाह्न

    अपने होने का एहसास
    उसके साथ
    हृदंगम हो !
    आभार !

  10. rashmi prabha said,

    सितम्बर 26, 2009 at 9:28 पूर्वाह्न

    koi rubru kara de……..bahut khoob

  11. kshama said,

    सितम्बर 26, 2009 at 10:03 पूर्वाह्न

    Waah ‘! Bas ek lafz….kitna sahee kaha…duniyaa aur duniyadaaree ke jhamelon me ham khud ko hee pahchan nahee pate!
    “Aaaina mujhse meree pahlisee soorat maange!”

  12. सितम्बर 26, 2009 at 10:50 पूर्वाह्न

    वाह वाह जी बहुत सुंदर .

  13. सितम्बर 26, 2009 at 11:19 पूर्वाह्न

    वाह बहुत सुंदर रचना.

    रामराम

  14. om arya said,

    सितम्बर 26, 2009 at 11:39 पूर्वाह्न

    आप थोडे से शब्दो मे बहुत कुछ कह जाती है …..खुबसूरत अभिव्यक्ति !

  15. jayantijain said,

    सितम्बर 26, 2009 at 12:34 अपराह्न

    beautiful expressions

  16. digamber said,

    सितम्बर 26, 2009 at 1:18 अपराह्न

    आज राह देख रहे
    उस अक्स से हमे भी
    कोई रूबरू करा दे…

    कमाल का लिखा है ……… कोई ये बात बता दे तो जीवन सफल ………..

  17. Kajal Kumar said,

    सितम्बर 26, 2009 at 3:04 अपराह्न

    बहुत सुंदर.

  18. सितम्बर 26, 2009 at 4:08 अपराह्न

    दर्पण झूट न बोले.

    सुन्दर रचना.

    दुर्गा पूजा एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

  19. सितम्बर 27, 2009 at 7:49 अपराह्न

    इष्टमित्रों और परिवार सहित आपको, दशहरे की घणी रामराम.

    रामराम.

  20. preeti tailor said,

    सितम्बर 28, 2009 at 9:03 पूर्वाह्न

    aksse haath milane jaate hai ,
    aayna hamen chhu jaata hai ….

  21. Mahfooz said,

    सितम्बर 28, 2009 at 2:13 अपराह्न

    Mehekji……….. maine itihaas kyun padhte hain ? iska jawab apne blog pe de diya hai हम इतिहास सिर्फ इसीलिए पढ़ते हैं क्यूंकि……. कल के सवाल का जवाब….
    http://lekhnee.blogspot.com/2009/09/blog-post_27.html

    plz dekhiyega…

  22. urmi said,

    सितम्बर 29, 2009 at 4:49 पूर्वाह्न

    सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ बहुत ही ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने ! विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें!


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