एका कल्पनेला

एका कल्पनेला वास्तवीकतेचे स्वरूप द्यायचे आहे
वास्तविक जे आहे , तेच स्वप्न म्हणून जगायचे आहे
या दोन जगाच्या टोकाना मिसळायचे आहे
पण त्या दोघांच्या मध्ये असलेल्या रेषेला सांभाळायाचे आहे
रोजची ही तारेवरची कसरत
फक्त पुढेच पुढे चालायचे आहे….

14 टिप्पणियाँ

  1. Mahfooz said,

    सितम्बर 29, 2009 at 3:12 अपराह्न

    mehekji……..Gud evening… mujhhe marathi to aati nahi……… phir bhi yeh jaanta hoon ki aapne kuch achcha hi likha hai……. to achcha likhne ke liye badhai…….. plz iska hindi translation bhi likh dijiyega (brackets) mein…

    regards………

    http://lekhnee.blogspot.com/2009/09/blog-post_27.html

  2. सितम्बर 29, 2009 at 3:34 अपराह्न

    हमें तो कुछ समझ ही नहीं आया.😦

  3. सितम्बर 29, 2009 at 4:26 अपराह्न

    हमारे तो उपर से निकल गई, पर चुंकी आप लिख रही हैं तो अच्छी पोएट्री ही होगी, वैसे मेरा निवेदन था कि इसका हिंदी अनुवाद लगा देती तो हमको भी आनंद आता और उसी के सहारे हम भी कुछ मराठी जैसी सशक्त भाषा के कुछ शब्द सीख जाते.

    रामराम.

  4. mehek said,

    सितम्बर 29, 2009 at 4:48 अपराह्न

    es kavita ka saar bas itana hai ke
    kalpana ko vastavikta ka swaroop dena hai
    haqiqat ko hi khwab sa jeena hai
    in dono ko milana hai
    magar inke bich ki rekha ko banaye rakhna bhi jaruri
    sapno aur haqiqat ka taal mel banate huye
    hame aage hi aage jana hai.

  5. सितम्बर 29, 2009 at 4:54 अपराह्न

    कल्पना को वास्तविकता का स्वरुप देना है
    हकीकत को ही ख्वाब सा जीना है
    इन दोनो को मिलाना है
    मगर इनके बीच की रेखा को बनाये रखना भी जरुरी
    सपनों और हकीकत का ताल मेल बनाते हुये
    हमे आगे ही आगे जाना है.

    वाह बहुत लाजवाब बात कही. शुभकामनाएं.

    रामराम.

  6. Mahfooz said,

    सितम्बर 29, 2009 at 5:39 अपराह्न

    कल्पना को वास्तविकता का स्वरुप देना है
    हकीकत को ही ख्वाब सा जीना है
    इन दोनो को मिलाना है
    मगर इनके बीच की रेखा को बनाये रखना भी जरुरी
    सपनों और हकीकत का ताल मेल बनाते हुये
    हमे आगे ही आगे जाना है

    कल्पना को वास्तविकता का स्वरुप देना है………हमे आगे ही आगे जाना है…………… real picture of life….

    bahut achchi kavita……….

  7. सितम्बर 29, 2009 at 5:42 अपराह्न

    अरे मेने तो सोचा हमारी महक आज खुशी मै पता नही क्या क्या लिख गई , लेकिन आप ने अर्थ बता कर बात समभाल ली. बहुत सुंदर लगी आप की यह लघु कविता.
    धन्यवाद

  8. सितम्बर 29, 2009 at 7:14 अपराह्न

    एका कल्पनेला वास्तवीकतेचे स्वरूप द्यायचे आहे
    वास्तविक जे आहे , तेच स्वप्न म्हणून जगायचे आहे
    या दोन जगाच्या टोकाना मिसळायचे आहे
    पण त्या दोघांच्या मध्ये असलेल्या रेषेला सांभाळायाचे आहे
    रोजची ही तारेवरची कसरत
    फक्त पुढ़ेच पुढे चालायच आहे
    इ स का हिन्दी अ नु वा द — एक कल्पना को यथार्थ् का रूप देना है और यथार्थ को स्वप्न मानकर जीना है । इन दो ध्रुवों को मिलाना है और इन्हे मिलाने वाली रेखा का जतन करना है । यद्यपि यह कसे हुए तार पर चलने की तरह बाज़ीगरी है लेकिन आगे ही बढ़ते जाना है ।-शरद कोकास

  9. सितम्बर 29, 2009 at 7:17 अपराह्न

    आता दोन अनुवाद इथे आहेत , पण हे विचार सुन्दर आहेत नक्की ।

  10. alpana said,

    सितम्बर 30, 2009 at 6:43 पूर्वाह्न

    Mahak…marathi mein kavita….anuvaad bhi kar detin ..:)to achcha lagta..

  11. om arya said,

    सितम्बर 30, 2009 at 9:49 पूर्वाह्न

    बहुत ही खुब!

  12. सितम्बर 30, 2009 at 10:11 पूर्वाह्न

    माफ करें, क्या ये मराठी में है? समझ की कोशिश तो बहुत की, पर…
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  13. Mahesh said,

    मार्च 30, 2010 at 5:09 पूर्वाह्न

    Hi mehek khupach sunder kavita ahe hi kavita choti asli tari ticha arth khup motha ahe.

  14. अक्टूबर 14, 2013 at 5:08 पूर्वाह्न

    simply great, thanks for sharing.


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