दिल के राज़

घटा सावन जब बरसाए
मंन पुलकित ये हो जाए
मैं पंख पसारे नाचू
हर बूँद सुनाए साज़

तू भी साथ मेरे आजाए
और प्रेम सुधा बरसाए
नस नस में बन के बिजली
ल़हेर जा फिर आज.

ये बेधुन्ध वादियाँ भी
अपने प्यार के गीत बजाए
कसम तुझे है मेरी
अब खोल दे दिल के राज़.

15 टिप्पणियाँ

  1. अक्टूबर 1, 2009 at 3:44 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर रचना है । प्यार भरी मुनहार बधाई

  2. अक्टूबर 1, 2009 at 3:47 पूर्वाह्न

    बहुत खूबसूरत रचना.

    रामराम.

  3. pallavi trivedi said,

    अक्टूबर 1, 2009 at 3:47 पूर्वाह्न

    बड़ी प्रेम भरी कविता है….

  4. digamber said,

    अक्टूबर 1, 2009 at 4:46 पूर्वाह्न

    प्रेम की आकांक्षा प्रस्तुत करती सुन्दर रचना है ……….. प्रेम का सुन्दर भावः ………

  5. rashmi prabha said,

    अक्टूबर 1, 2009 at 4:54 पूर्वाह्न

    bilkul pahle ki tarah khankte saaj sunti hun aapki lekhni me,
    mantramugdh ho jati hun

  6. lalit sharma said,

    अक्टूबर 1, 2009 at 5:49 पूर्वाह्न

    तू भी साथ मेरे आजाए
    और प्रेम सुधा बरसाए
    नस नस में बन के बिजली
    ल़हेर जा फिर आज.

    शानदार,बधाई

  7. अक्टूबर 1, 2009 at 6:42 पूर्वाह्न

    घटा सावन जब बरसाए
    मंन पुलकित ये हो जाए
    मैं पंख पसारे नाचू
    हर बूँद सुनाए साज़.

    सुन्दर !

  8. अक्टूबर 1, 2009 at 9:03 पूर्वाह्न

    sundar shabd sanyojan
    bhaavpoorn rachna

    badhayi

  9. om arya said,

    अक्टूबर 1, 2009 at 9:47 पूर्वाह्न

    bhaawmay rachana jaha har ek panktiya mano prem se bahri padi hai…………..

  10. अक्टूबर 1, 2009 at 5:56 अपराह्न

    तू भी साथ मेरे आजाए
    और प्रेम सुधा बरसाए
    नस नस में बन के बिजली
    ल़हेर जा फिर आज.
    क्या कहने जी, बहुत सुंदर
    धन्यवाद

  11. Rohit Jain said,

    अक्टूबर 2, 2009 at 2:59 पूर्वाह्न

    बेहतरीन इंतेख़ाब

  12. Mahfooz said,

    अक्टूबर 2, 2009 at 7:42 पूर्वाह्न

    तू भी साथ मेरे आजाए
    और प्रेम सुधा बरसाए
    नस नस में बन के बिजली
    ल़हेर जा फिर आज.

    kitna pyar hai is kavita mein……

    कसम तुझे है मेरी
    अब खोल दे दिल के राज़….

    haan! yahi to hai true love…… jahan saare raaz khol diye jayen………

    kya kahoon is sunder kavita ke baare mein……………

    bas! bahut sukoon sa mila isko padh ke….

    GR8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 8 ………. n speechless……

  13. preeti tailor said,

    अक्टूबर 4, 2009 at 4:54 पूर्वाह्न

    nahin nahin ye pyare se mausam ka ham man bhar ke anand uthate hai …aur raaj aaj nahin batayenge …

  14. vijay kumar said,

    अक्टूबर 8, 2009 at 8:31 पूर्वाह्न

    mehak …

    kaay saangu .. he poem mala kasachi chuan deuan geli…

    tumhii itke faar kasa lihta ..

    just kudos friend..

    regards

    vijay


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: