ख्वाबों का आशियाँ

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नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
हमारी मोहोब्बत से सज़ा  ख्वाबों का आशियाँ 

सूबह की सुनहरी किरने करती नृत्य झंकार
पवन हिचकौले , तन मन डोले ,छेड़े सुर सितार

रंग बिरंगी फूलों में थिरकन रचती फिर प्रीत
दिल की ल़हेरॉं में सिरहन  तू आए जो मधु मीत

 

पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन

21 टिप्पणियाँ

  1. preeti tailor said,

    अक्टूबर 23, 2009 at 5:03 पूर्वाह्न

    ati sundar
    पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
    तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन

  2. अक्टूबर 23, 2009 at 5:18 पूर्वाह्न

    सूबह की सुनहरी किरने करती नृत्य झंकार
    पवन हिचकौले , तन मन डोले ,छेड़े सुर सितार

    बहुत सही व बढियां लिखा है।बधाई।

  3. kishore said,

    अक्टूबर 23, 2009 at 5:23 पूर्वाह्न

    bahut khoob

  4. अक्टूबर 23, 2009 at 5:42 पूर्वाह्न

    ek achhi koshish se bhari rachnaa

  5. ranju said,

    अक्टूबर 23, 2009 at 6:00 पूर्वाह्न

    यह प्रीत यूँ ही सजती रहे अच्छा लिखा है आपने महक

  6. rashmi prabha said,

    अक्टूबर 23, 2009 at 8:03 पूर्वाह्न

    यूँ लगा,जैसे सारी प्रकृति गुनगुना उठी ……दोनों मिलकर बनेंगे प्रीत

  7. om arya said,

    अक्टूबर 23, 2009 at 9:29 पूर्वाह्न

    tumase hi sajhe dhadakan atisundar ………dil ko jhankrit karati rachana

  8. अक्टूबर 23, 2009 at 9:30 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर रचना.
    धन्यवाद

  9. अक्टूबर 23, 2009 at 10:27 पूर्वाह्न

    पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
    तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन

    महक बहुत् दिन बाद पढा। आज भी कम्प्यूटर आन करते ही भीनी भीनी सीमहक आ रही थी देखा तो महक ही थी। कई दिन बाद आने की माफी चाहती हूँ बहुत सुन्दर प्यारी से रचना के लिये बधाई और शुभकामनायें

  10. अक्टूबर 23, 2009 at 11:17 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर रचना.

    रामराम.

  11. अक्टूबर 23, 2009 at 11:30 पूर्वाह्न

    नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
    हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ

    बहुत बढियां लिखा है
    सुन्दर रचना के लिये बधाई

    हमारी शुभ कामनाएं

  12. अक्टूबर 23, 2009 at 12:21 अपराह्न

    बहुत सुंदर, मधुर!

  13. Mahfooz said,

    अक्टूबर 23, 2009 at 6:39 अपराह्न

    नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
    हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ

    wah! yeh pankitiyan bahut achchi lagin…..

    ati sunder kavita……

    aisa laga ki bahut doob kar likha hai aapne……….

  14. kshama said,

    अक्टूबर 24, 2009 at 4:24 पूर्वाह्न

    Behad sundar rachna…thiraktee huee manme utar gayee…aur dhadkanon me sama gayee..

  15. digamber said,

    अक्टूबर 24, 2009 at 8:01 पूर्वाह्न

    नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
    हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ

    SACH MEIN VO SUNAHRA AASHIYAAN YAHI TO HAI ….. MAN KI BAAT LIKH DI AAPNE … BAHOOT KHOOB

  16. alpana said,

    अक्टूबर 25, 2009 at 4:22 पूर्वाह्न

    नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
    हमारी मोहोब्बत से सज़ा ख्वाबों का आशियाँ

    bahut hi sundar bhaav Mahak

  17. Mahfooz said,

    अक्टूबर 26, 2009 at 4:53 पूर्वाह्न

    Awwwww…….. jus came to see some new….

    Well!!!

    Gud morning….

  18. अक्टूबर 26, 2009 at 5:39 अपराह्न

    बहुत ही सुंदर मैम…मनमोहक!

  19. Urmi said,

    अक्टूबर 27, 2009 at 1:42 पूर्वाह्न

    बहुत ख़ूबसूरत और उम्दा रचना लिखा है आपने ! इस शानदार रचना के लिए बधाई !

  20. अक्टूबर 29, 2009 at 12:30 अपराह्न

    पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
    तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़क
    बहुत सुंदर रचना.
    धन्यवाद

  21. अक्टूबर 31, 2009 at 12:15 अपराह्न

    पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
    तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन

    lovely! Pyar ke riste to milkar hi nibhana hai🙂


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