मासूम लम्हे

दिल के आँगन में
यूही कभी कभी
खेलते नज़र आते है
हुल्लड़ मचाते
खुद ही रूठते
खुद को ही मनाते
झगड़ते,जीतते,हारते
नीर बहाते,मीठे हसते
बिन कारण नाचते,गाते
दुनिया से बेख़बर
मदमस्त जीते,चलते
कुछ स्पष्ट,कुछ अस्पष्ट से
कुछ गहरे,कुछ बिखरे हुए
बचपन के मासूम लम्हे
और जब मैं
इनके पीछे भागती हूँ
उन्हे समेट लेना चाहती हूँ
उड़ -उड़ जाते है
इस फूल से उस फूल
अपने रंग फ़िज़ाओ में छोड़
तितली की तरह
कभी हाथ न आने के लिए |

33 टिप्पणियाँ

  1. eclecticalaplomb said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 5:46 पूर्वाह्न

    Beautiful poem..

  2. kshama said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 5:54 पूर्वाह्न

    Lamhon kee tarah maasoom -see kavita…man me titlee tarah fudakti rahi…aur haath naa aayi..man me bas gayi…fizaon me bhee rang bikher gayi…jab ‘bade’ ho jate hain, tabhi to bachpan bulata hai..bachpan ka gharbhi bulata hai,jo badal gaya hota hai..

  3. अक्टूबर 30, 2009 at 6:00 पूर्वाह्न

    khoobsurat ehsas……

  4. अक्टूबर 30, 2009 at 6:23 पूर्वाह्न

    बहुत खूबसूरत सोंच !!

  5. अक्टूबर 30, 2009 at 6:40 पूर्वाह्न

    सुंदर भाव हैं, जो मन को छू से गये हैं। इससे ज्यादा और क्या लिखूं, डर है कि कहीं अतिश्योक्ति जैसी स्थित न हो जाए। बधाई।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  6. अक्टूबर 30, 2009 at 6:42 पूर्वाह्न

    सुंदर भाव हैं, बन को छू गये। इससे ज्यादा कुछ कहूंगा तो शायद अतिश्योक्ति हो जाए। वैसे इस कविता के लिए आपको बधाई तो दी ही जा सकती है।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  7. Mahfooz said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 6:56 पूर्वाह्न

    उड़ -उड़ जाते है
    इस फूल से उस फूल
    अपने रंग फ़िज़ाओ में छोड़
    तितली की तरह
    कभी हाथ न आने के लिए …….

    uff! bahut hi achchi lagi yeh kavita……

    aapki kavitayen dil chhoo lene wali hotin hain…….

  8. akhilesh said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 7:03 पूर्वाह्न

    बहुत खूबसूरत ,सुन्दर भाव.

  9. ranju said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 7:16 पूर्वाह्न

    सुन्दर लम्हे इसी तरह होते हैं कब हाथ आते हैं यह ..अच्छा लिखा है आपने

  10. om arya said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 8:21 पूर्वाह्न

    bahut hee badhiya likhi hai aapane ………………….behad khubsurat!

  11. preeti tailor said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 9:15 पूर्वाह्न

    bachpan jabhi yaad aata hai hothon par ek pyari muskurahat chhode jaata hai …

  12. rashmi prabha said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 9:24 पूर्वाह्न

    छोटी छोटी ख़ुशी,छोटे छोटे वो गम…………कोई लौटा देता,
    मृगछौने – सा बांहों में भरकर दे जाता

  13. sada said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 10:35 पूर्वाह्न

    बचपन के मासूम लम्हे
    और जब मैं
    इनके पीछे भागती हूँ
    उन्हे समेट लेना चाहती हूँ

    बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

  14. yogesh swapn said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 12:22 अपराह्न

    bahut sunder abhivyakti.

  15. अक्टूबर 30, 2009 at 12:28 अपराह्न

    बहुत सुंदर लगी आप की यह कविता…. धन्यवाद

  16. M Verma said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 1:02 अपराह्न

    सुन्दर भावनात्मक रचना और अनुभूतियो का सरस प्रवाह

  17. अक्टूबर 30, 2009 at 1:04 अपराह्न

    Baalpan ko jagati uske liye lalayit karti bahut hi sundar kavita…
    Titli to fir bhi pakad me aa jati hai par gaye hue din to kabhi nahi aate pakad me…

  18. Abyaz said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 3:50 अपराह्न

    लम्हे कभी महक की गिरफ्त से छूट नहीं सकते। इन लम्हों को हमेशा के लिए कैद कर लो। बहुत शानदार कविता है।

  19. रंजन said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 5:00 अपराह्न

    bahut khub…

  20. Haresh Kanani said,

    अक्टूबर 30, 2009 at 5:42 अपराह्न

    Aapka blog pasand Aaya . mere blog ki mulakatleke kuch sujav dijiAe .
    http://palji.wordpress.com

  21. devendra said,

    अक्टूबर 31, 2009 at 3:20 पूर्वाह्न

    लम्हें फिसलते हैं
    बस याद रह जाती है
    –अच्छे भाव।

  22. अक्टूबर 31, 2009 at 12:06 अपराह्न

    Bahut sunder! Zindagi bhi to rang birangi titaliyon ke tarah hai!

  23. anil sharma said,

    अक्टूबर 31, 2009 at 4:19 अपराह्न

    खुबसूरत रचना ( अहसास ) है

  24. digamber said,

    अक्टूबर 31, 2009 at 5:36 अपराह्न

    har aane vaala lamhe ki aas aur har beete huve lamhe ki yaad dil ko gahre ehsas mein le jaati hai … aise hi lamhon ko sanjo kar likhi sundar rachna ….

  25. अक्टूबर 31, 2009 at 6:46 अपराह्न

    बेहद खूबसूरत रचना.

    रामराम.

  26. नवम्बर 1, 2009 at 12:14 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर

  27. jayantijain said,

    नवम्बर 1, 2009 at 5:00 पूर्वाह्न

    Memories have gone but u caused a chance to relive them

  28. नवम्बर 1, 2009 at 7:29 अपराह्न

    सुंदर भावाव्यक्ति….प्रभावित करती है…

  29. नवम्बर 10, 2009 at 3:58 अपराह्न

    खूपच छान . ते बालपणाचे नाचते उडते क्षण कधी कधी येतात मनाच्या अंगणात .

  30. नवम्बर 16, 2009 at 5:09 अपराह्न

    good .pless viset may blog
    http://palji.wordpress.com

  31. padmsingh said,

    दिसम्बर 19, 2009 at 2:05 पूर्वाह्न

    महक जी आपकी रचनाएँ कहीं बहुत अंदर तक जाती है वज़ूद के… अति सुंदर

  32. padmsingh said,

    दिसम्बर 19, 2009 at 2:19 पूर्वाह्न

    महक जी.. मै नया ब्लॉगर हूँ.. मै क्या करूँ की ज्यादा से ज्यादा लोग मेरा ब्लॉग पढ़ें … ब्लोग्वानी, चिट्ठाजगत का ताग कैसे लगा सकता हूँ .. कृपया सहायता करें

  33. padmsingh said,

    दिसम्बर 25, 2009 at 1:16 अपराह्न

    apki nayi post nahi aayi abhi tak…… hamen Intazaar hai


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