किसी पल में

किसी पल में
तलाशता है अपना मन
खुद का खोया वजूद
निगाहो से दिल में झाक ले
वो वही मिलेगा….

====================
डर का अंधेरा
उजालों का समंदर बन जाएगा
ज़रा हाथ थामकर
विश्वास की राह पर
चल के तो देख
ये जादू होगा….

===================
सवालों की चुनर
क्या दिशायें देंगी उत्तर
ल़हेरा के देखली
आख़िर ओढ़ली
हलचल करनी होगी
निस्तब्ध होकर
कुछ हासिल नही……

22 टिप्पणियाँ

  1. नवम्बर 2, 2009 at 6:09 पूर्वाह्न

    डर का अंधेरा
    उजालों का समंदर बन जाएगा
    ज़रा हाथ थामकर
    विश्वास की राह पर
    चल के तो देख
    ये जादू होगा…

    बहुत सुंदर रचना.

    रामराम.

  2. M Verma said,

    नवम्बर 2, 2009 at 6:33 पूर्वाह्न

    निगाहो से दिल में झाक ले
    वो वही मिलेगा….
    जी हाँ खोया वज़ूद तो वही मिलेगा
    सुन्दर रचना

  3. Mahfooz said,

    नवम्बर 2, 2009 at 6:34 पूर्वाह्न

    डर का अंधेरा
    उजालों का समंदर बन जाएगा
    ज़रा हाथ थामकर
    विश्वास की राह पर
    चल के तो देख
    ये जादू होगा….

    Bahut hi sunder panktiyan…….

  4. नवम्बर 2, 2009 at 6:44 पूर्वाह्न

    प्रभावित किया आपकी शैली ने

    और शब्दावली ने भी……………

    कविता ने तो किया ही

    डर का अंधेरा
    उजालों का समंदर बन जाएगा

    वाह !

  5. rashmi prabha said,

    नवम्बर 2, 2009 at 9:34 पूर्वाह्न

    क्षणिकाएं तो तीन हैं , पर सबके पडाव इन्हीं शब्दों की ताबीर में हैं
    ……. किसी पल में
    तलाशता है अपना मन
    खुद का खोया वजूद
    निगाहो से दिल में झाक ले
    वो वही मिलेगा

  6. ranju said,

    नवम्बर 2, 2009 at 10:38 पूर्वाह्न

    तीनों ही बहुत अच्छी लगी मुझे ..

  7. om arya said,

    नवम्बर 2, 2009 at 10:56 पूर्वाह्न

    निगाहो से दिल में झाक ले
    वो वही मिलेगा….
    जी हाँ खोया वज़ूद तो वही मिलेगा

    बिल्कुल सही लिखा है ……………मै भी कुछ ऐसा ही सोचता हूँ …………..एक अच्छी रचना!

  8. vani geet said,

    नवम्बर 2, 2009 at 11:04 पूर्वाह्न

    निगाहों से दिल में झाँकने पर ही वजूद दिखाई देगा …
    हलचल करनी होगी ..निस्तब्ध होकर कुछ हासिल नहीं …देर किस बात की है …इन क्षणिकाओं ने हलचल कर तो दी है …!!

  9. रंजन said,

    नवम्बर 2, 2009 at 12:35 अपराह्न

    uttam.. ati uttam..

  10. kshama said,

    नवम्बर 2, 2009 at 3:16 अपराह्न

    Khud kaa wajood khona sabse adhik darawnaa anubhav hota hai…ye sazaa khudaa kisee ko na de!

  11. नवम्बर 2, 2009 at 5:35 अपराह्न

    अति सुंदर रचना धन्यवाद

  12. muflis said,

    नवम्बर 3, 2009 at 2:55 पूर्वाह्न

    ज़रा हाथ थामकर
    विश्वास की राह पर
    चल के तो देख
    ये जादू होगा….

    km lafzoN meiN dher sare asar ka
    jaadu huaa to hai
    bahut achhee rachnaaeiN haiN
    badhaae svikaareiN

  13. preeti tailor said,

    नवम्बर 3, 2009 at 4:47 पूर्वाह्न

    ek baar fir kam shabdoka jaadu bikhara hai …

  14. नवम्बर 3, 2009 at 9:24 पूर्वाह्न

    खुद का खोया वजूद
    निगाहो से दिल में झाक ले
    वो वही मिलेगा….

    waah… maine bhi apni nayi kavita ke through use dhoondhne ki koshish ki hai..aap dekh le to wo dhanya ho jaye🙂

    shukriya..

  15. digamber said,

    नवम्बर 3, 2009 at 1:25 अपराह्न

    डर का अंधेरा
    उजालों का समंदर बन जाएगा
    ज़रा हाथ थामकर
    विश्वास की राह पर
    चल के तो देख
    ये जादू होगा…

    BAHOOT HI LAJAWAAB, UTTAM RACHNA HAI … KUCH HI SHABDON MEIN KAHI LAMBEE BAAT …..

  16. नवम्बर 4, 2009 at 1:09 अपराह्न

    डर का अंधेरा
    उजालों का समंदर बन जाएगा

    बहुत ही सुंदर और आस भरी रचना महक जी ।

  17. Abhishek said,

    नवम्बर 6, 2009 at 8:58 अपराह्न

    निस्तब्ध होकर
    कुछ हासिल नही………..सच है ….!

  18. rajeysha said,

    नवम्बर 7, 2009 at 9:28 पूर्वाह्न

    किसी पल में
    तलाशता है अपना मन
    खुद का खोया वजूद
    निगाहो से दिल में झाक ले
    वो वही मिलेगा….

    जि‍सको मि‍ला है वहीं मि‍ला है, इस बार नहीं अगली बार सही।

  19. नवम्बर 8, 2009 at 5:54 अपराह्न

    र का अंधेरा
    उजालों का समंदर बन जाएगा
    ज़रा हाथ थामकर
    विश्वास की राह पर
    चल के तो देख
    ये जादू होगा….

    बेहतरीन अभिव्यक्ति..बढ़िया कविता..बधाई

  20. akshay-man said,

    नवम्बर 10, 2009 at 12:37 पूर्वाह्न

    sundar rachna bahut hi accha likha hai aapne………
    koi kshinika nahi kahuinga sab acchi hain koi bhed bhav nahi sab dil se likhi hain………
    माफ़ी चाहूंगा स्वास्थ्य ठीक ना रहने के कारण काफी समय से आपसे अलग रहा

    अक्षय-मन “मन दर्पण” से

  21. alpana verma said,

    नवम्बर 10, 2009 at 7:44 अपराह्न

    teeno rachnayen pasand aayin mahak..

  22. नवम्बर 11, 2009 at 5:33 पूर्वाह्न

    खुद का खोया वजूद
    निगाहो से दिल में झाक ले
    वो वही मिलेगा….

    बेहतरीन अभिव्यक्ति
    बहुत सुंदर रचना

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