रसीली मिठास

बहुत दिनो बाद, शायद बहुत सालों बाद किसी ने घर पर खेत के गन्ने भेजे | गन्ने हो और मुह में पानी ना आए,
ऐसा हो ही नही सकता | झट से एक उठाया और अपने सो कॉल्ड मजबूत दातों पे भरोसा कर , छीलने की कोशिश
शुरू कर दी | पर बचपन की प्रॅक्टीस वो भूल चुके थे | सारा मुह छील गया, मगर गन्ना नही | आखिर बड़े,वज़नदार
चाकू से ये काम तमाम हुआ |
मीठे ,रसीले होते छोटे टुकड़े, दातों तले दब कर मिठास घोलने लगे , ज़बान से, गले तक,और गले से आत्मा तक |
कोई पूछे शहद से मीठा कुछ है, हाँ है,गन्ने को चूस के खाने का मज़ा:) |
बचपन में खेतों में दौड़ते, दातों से बड़े बड़े गन्ने छीलते,खाते, सारी मस्ती दिमाग में हुल्लड़ मचा रही है |
हाइवे पर गन्ने से लदे ट्रक में से गन्ने भी खिचे थे तब | आज गन्ने है पर वो उधम नही | फिर भी यादों में रसीली मिठास
मिली हुई है |

19 टिप्पणियाँ

  1. संगीता पुरी said,

    नवम्बर 13, 2009 at 6:37 पूर्वाह्न

    आज गन्ने है पर वो उधम नही | फिर भी यादों में रसीली मिठास
    मिली हुई है |

    पर यादें भी तो मीठास घोलती ही रहती हैं !!

  2. Mahfooz said,

    नवम्बर 13, 2009 at 7:17 पूर्वाह्न

    waaqai mein ganne ki mithaas hi alag hoti hai…..

  3. ranju said,

    नवम्बर 13, 2009 at 7:57 पूर्वाह्न

    सही कहा ..वह मिठास ही अलग होती थी

  4. pallavi trivedi said,

    नवम्बर 13, 2009 at 8:20 पूर्वाह्न

    बहुत दिन हो गए गन्ना खाए हुए….चलो अब हम भी अपने दांत आजमा ही लेते हैं!

  5. नवम्बर 13, 2009 at 8:20 पूर्वाह्न

    wo ganna nahi .yadein thi,jisne mithas gholi …….yadein bhi toh ganna hi hoti hai …..ek kade se dimag mein chhupa hua sahad !!!

  6. shyamalsuman said,

    नवम्बर 13, 2009 at 8:39 पूर्वाह्न

    रचना पढ़ते ही जगी मन में मीठी प्यास।
    मिले ईख जब सुमन को पाये वही मिठास।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com

  7. preeti tailor said,

    नवम्बर 13, 2009 at 9:09 पूर्वाह्न

    ganne chabanewale dant baboolki tahniko dant saaf karte the aur ham to toothpaste aur toothbrush ke mulayam resho ke aadi hai naa ….
    ek achchha lekh …
    bahut dinon ki pratiksha ke baad aapki post nazar aayi ….
    aap hame ek saheli si lag rahe ho …

  8. om arya said,

    नवम्बर 13, 2009 at 10:43 पूर्वाह्न

    ganne ka mithas thik waise hi mitha hota hai jaisa ki bachapan ki yaden

  9. rashmi prabha said,

    नवम्बर 13, 2009 at 11:52 पूर्वाह्न

    आहा गन्ने ……जब कोई ऐसी बात आती है तो मन जाने किन गलियों में चला जाता है……
    हम भई-बहन बैलगाड़ी से गन्ने खींचते थे…….और उस गन्ने की मीठास !!!!!!!!

  10. M Verma said,

    नवम्बर 13, 2009 at 12:12 अपराह्न

    गन्ने तो फिर भी गाहे बगाहे मिठास घोलते ही रहते है चाहे चाकू का ही सहारा क्यो न लेना पडे. पर यादे ————–

  11. नवम्बर 13, 2009 at 12:19 अपराह्न

    गन्ने तो हन्ने ही हैं, बचपन की यादें तो इनमें सिमटी ही हैं. वैसे प्रेक्टीस करते रहे तो चाकू की जरुरत नही पडेगी.:)

    रामराम.

  12. नवम्बर 13, 2009 at 12:20 अपराह्न

    भूल सुधार

    हन्ने = गन्ने

    पढें.

    रामराम.

  13. नवम्बर 13, 2009 at 4:01 अपराह्न

    गन्ना आह , बचपन की याद दिला दी अह तो गन्ना खाये सालों हो गये दाँतों को जो बचा के रखना है ।

  14. नवम्बर 13, 2009 at 5:11 अपराह्न

    बड़ी पुरानी याद दिला दी..अब तो जमाना गुजरा गन्ना चूसे!!

  15. नवम्बर 13, 2009 at 8:08 अपराह्न

    बचपन और गांव का बचपन क्या कहने!

  16. digamber said,

    नवम्बर 14, 2009 at 8:03 पूर्वाह्न

    Vaah … aapne bachpan ki yaad taza kara di … ganna choopna … aah .. ras aa gaya munh mein ..

  17. Kajal Kumar said,

    नवम्बर 14, 2009 at 12:50 अपराह्न

    सुंदर:)

  18. नवम्बर 15, 2009 at 4:58 पूर्वाह्न

    गन्नों से तो मेरी भी कई यादें जुड़ी हैं.. मेरे खुद के खेत में गन्ने ही पैदा होते हैं… उसके बावजूद दूसरे के खेत से गन्ने तोड़कर खाने का मज़ा ही कुछ और होता था.. मैंने तो स्कूल के दौरान ट्रक से खींचकर भी गन्ने खाए हैं… और आपको मालूम है गन्ने के रस की खीर भी बनती है… जिसे हम लोग रसावल कहते हैं… लेकिन दिल्ली में ये सारे ऐश कहां.. अब तो गन्ने खाए हुए भी कई साल हो गये… लेकिन आपके गन्ने ने सचमुच मुंह मीठा कर दिया…

  19. नवम्बर 15, 2009 at 6:12 अपराह्न

    रसीली पोस्ट…


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: