नज़दीकियाँ

 

 

 

 

जब मैं उदास होती हूँ 
मन में ही सिसकती रोती हूँ 
बिन कारण ही,ऐसे ही 
भावनाओ की नदिया में डूब जाती हूँ 
कोई आधार नही होता उन बातों का 
जानती हूँ , मगर फिर भी 
चली जाती हूँ उन राहों पर 
दिल हल्का हो जाता है 
उस वक़्त तेरी नज़दीकियाँ 
मेरा आधार बनती है 
मेरे जज़्बातों का आकार बनती है
तुम्हारा कुछ ना कह कर भी 
सब कुछ कहना, 
मेरी लहरों के बहाव को सहना 
महसूस करती हूँ मैं 
उस पल के सम्मोहन का
इंतज़ार करती हूँ मैं |

16 टिप्पणियाँ

  1. Mahfooz said,

    नवम्बर 23, 2009 at 5:57 पूर्वाह्न

    bahut hi sunder kavita….. dil ko choo gayi………

  2. sada said,

    नवम्बर 23, 2009 at 6:15 पूर्वाह्न

    sunder kavita

  3. neerpal singh said,

    नवम्बर 23, 2009 at 6:20 पूर्वाह्न

    sundar ati sundar

    marmsparshi bhaav

  4. vani geet said,

    नवम्बर 23, 2009 at 6:22 पूर्वाह्न

    तुम्हारा कुछ ना कह कर भी
    सब कुछ कहना, …
    ऐसी मुलाकातें सम्मोहित तो करेंगी ही …बहुत बढ़िया …!!

  5. नवम्बर 23, 2009 at 6:28 पूर्वाह्न

    bahut sundar abhivyakti hai aapakaa intazaar khatm ho shubhakaamanaayeM

  6. jyoti said,

    नवम्बर 23, 2009 at 6:53 पूर्वाह्न

    kya kahe… lajawab rachna hai, laga mere dil ki baat kah di apne..

  7. anil kant said,

    नवम्बर 23, 2009 at 8:07 पूर्वाह्न

    dil se likhi gayi rachna

  8. rashmi prabha said,

    नवम्बर 23, 2009 at 9:08 पूर्वाह्न

    तुम्हारा कुछ ना कह कर भी
    सब कुछ कहना, ………yahi aadhar hai aapsi samajh ka

  9. RAJNISH PARIHAR said,

    नवम्बर 23, 2009 at 11:10 पूर्वाह्न

    JAB HUM AKELE HOTE HAI TO AKSAR AISE HI VICHAR AATE HAI MAN ME…..

  10. preeti tailor said,

    नवम्बर 23, 2009 at 2:41 अपराह्न

    sach kaha …khud se najadikiyan to udasi men hi banti hai …

  11. digamber said,

    नवम्बर 23, 2009 at 6:05 अपराह्न

    तुम्हारा कुछ ना कह कर भी
    सब कुछ कहना, …

    किसी के होने न होने से बहुत फर्क पढता है ……….. फिर अगर वो हों जिनका कहना अच्छा लगे तो बात ही क्या है ……… बहुत खूब लिख़ा है ………

  12. urmi said,

    नवम्बर 24, 2009 at 10:29 पूर्वाह्न

    बहुत ही सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है ! दिल को छू गई !

  13. नवम्बर 24, 2009 at 4:02 अपराह्न

    तुम्हारा कुछ ना कह कर भी
    सब कुछ कहना,
    मेरी लहरों के बहाव को सहना
    महसूस करती हूँ मैं
    उस पल के सम्मोहन का
    इंतज़ार करती हूँ मैं |
    वाह बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है बधाई

  14. नवम्बर 24, 2009 at 4:47 अपराह्न

    बहुत खूब

  15. devendra said,

    नवम्बर 27, 2009 at 3:06 पूर्वाह्न

    सुंदर कविता.. बधाई
    लेकिन आपने यह तो बताया ही नहीं कि
    वो घर किसका है
    इतना सुंदर घर और इतनी उदासी!

  16. amrendra nath tripathi said,

    नवम्बर 27, 2009 at 3:45 अपराह्न

    सुन्दर …
    अपने भावों को बड़ी इमानदारी के
    साथ रखा गया है …
    शुक्रिया … …


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