रब्बा भले मैं क्यों ना सोती ही मर जाउँ |

रात प्रहर खुद को गहरी नींद में पाया
सपनो में हमसे मिलने साजन आया |

वक़्त का लम्हा था कुछ रुका रुका सा
नज़रों का परचम था झुका झुका सा |

मिलकर गाए मधुर सुर प्रीत के गीत
एक दिल जान हुए हम जो मिले मीत |

आँखें ना खोलूँगी उनसे ना बिछड़ जौउँ
रब्बा भले मैं क्यों ना सोती ही मर जाउँ |

28 टिप्पणियाँ

  1. padmsingh said,

    दिसम्बर 17, 2009 at 2:16 अपराह्न

    kya baat hai…… kya baat hai…… sach dil ko chhoo gayi…

  2. दिसम्बर 17, 2009 at 3:20 अपराह्न

    वक़्त का लम्हा था कुछ रुका रुका सा
    नज़रों का परचम था झुका झुका सा |

    खूबसूरत ग़ज़ल…बहुत अच्छा लगा..धन्यवाद जी

  3. दिसम्बर 17, 2009 at 3:22 अपराह्न

    वक़्त का लम्हा था कुछ रुका रुका सा
    नज़रों का परचम था झुका झुका सा

    खूबसूरत ग़ज़ल…बहुत अच्छा लगा..धन्यवाद जी

  4. vinay said,

    दिसम्बर 17, 2009 at 3:46 अपराह्न

    खूबसरत रचना ।

  5. दिसम्बर 17, 2009 at 3:54 अपराह्न

    उफ़्फ़ बिछोह का इतना डर …कमाल है एक दम कमाल

  6. दिसम्बर 17, 2009 at 3:59 अपराह्न

    क्या बात है जी

  7. Rewa Smriti said,

    दिसम्बर 17, 2009 at 5:18 अपराह्न

    वक़्त का लम्हा था कुछ रुका रुका सा
    नज़रों का परचम था झुका झुका सा |

    Wah wah…jhuki jhuki si nazar…..

  8. Mahfooz said,

    दिसम्बर 17, 2009 at 6:40 अपराह्न

    खूबसूरत ग़ज़ल…बहुत अच्छा लगा…..

  9. दिसम्बर 18, 2009 at 6:55 पूर्वाह्न

    बेहद खूबसूरत प्रेम गीत. सिर्फ प्रेम ही क्यों-भक्ति गीत भी. बहुत मेहनत से रचा गया लगता है. रचना में तारतम्यता आरम्भ से अंत तक बनी हुई है, जो आपके सिद्धस्त होने का परिचायक है. मेरी तरफ से इस खूबसूरत रचना के लिए मुबारकबाद.

  10. preeti tailor said,

    दिसम्बर 18, 2009 at 9:58 पूर्वाह्न

    meera ki krishna ke prati ki jhalak dikhalaati lagi ye kavita ….bahutkhub …

  11. vish said,

    दिसम्बर 18, 2009 at 11:11 पूर्वाह्न

    आँखें ना खोलूँगी उनसे ना बिछड़ जौउँ
    रब्बा भले मैं क्यों ना सोती ही मर जाउँ |

    i love these lines……..good work yaar!!

    Jai ho mangalmay ho

  12. alpana said,

    दिसम्बर 19, 2009 at 5:06 पूर्वाह्न

    Waah! bahut sundar !

  13. दिसम्बर 20, 2009 at 12:40 पूर्वाह्न

    Jo sajna aur tere beech mein tha..
    voh ek khwab tha…
    Jee le tu apni zindagi…
    Qued kar lena… agar naseeb mein hoga tujhe tera rehnuma…

  14. Abyaz said,

    दिसम्बर 20, 2009 at 5:07 अपराह्न

    आंखे न खोलूंगी, क्यों न सोती ही मर जाऊं…

    दिल को छू गईं लाइनें… बेहतरीन कहूं…. लाजवाब कहूं… अल्फ़ाज़ नहीं हैं मेरे पास…

  15. दिसम्बर 23, 2009 at 2:12 अपराह्न

    शेवटची औळ खूप भावली ।

  16. psingh said,

    जनवरी 1, 2010 at 11:59 पूर्वाह्न

    इस सुन्दर रचना के लिए धन्यवाद
    नव वर्ष की शुभ कामनाएं

  17. जनवरी 3, 2010 at 8:15 पूर्वाह्न

    Hi Mehek, Happy new year! keep writing…

  18. Alpana said,

    जनवरी 4, 2010 at 4:12 पूर्वाह्न

    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

  19. Alpana said,

    जनवरी 4, 2010 at 4:13 पूर्वाह्न

    kahan kho jaati ho …????bahut din ho gaye koi post nahin koi khabar nahin????
    hope everything is fine..tc

  20. rashmi prabha said,

    जनवरी 6, 2010 at 9:18 पूर्वाह्न

    भावनाओं का उज्जवल स्वरुप

  21. kshama said,

    जनवरी 20, 2010 at 8:31 पूर्वाह्न

    आँखें ना खोलूँगी उनसे ना बिछड़ जौउँ
    रब्बा भले मैं क्यों ना सोती ही मर जाउँ |
    Ye tamanna to meree bhee hai! Behad sundar rachana!

  22. dipayan said,

    जनवरी 23, 2010 at 9:33 पूर्वाह्न

    बहुत खूब लिखा आपने । बधाई ।

  23. फ़रवरी 11, 2010 at 1:50 अपराह्न

    मेहेक काय झालंय खूप दिवसांत कांही लिहिलं नाही. कुणाच्या ब्लॉग वर कमेंट पण नाही .

  24. दिनेश शर्मा said,

    फ़रवरी 14, 2010 at 6:16 पूर्वाह्न

    आँखें ना खोलूँगी उनसे ना बिछड़ जौउँ
    रब्बा भले मैं क्यों ना सोती ही मर जाउँ |

  25. alpana verma said,

    फ़रवरी 27, 2010 at 12:15 अपराह्न

    Mahak ,होली की रंगबिरंगी शुभकामनाएँ.

  26. shubhash kaushik said,

    फ़रवरी 28, 2010 at 3:28 अपराह्न

    virah prem ki jagrat gati hai aur shusupti milan hai

  27. मार्च 7, 2010 at 11:41 पूर्वाह्न

    I fully agree to the title of the poem.Poet is in a dreamland of fantasies,if he/she wakes up he/she wont be able to face the harsh realities of world!where fantasies are replaced by factual hardships!so it would be apt t folllow the title ——!Bonvoyage !

  28. alpana said,

    मार्च 7, 2010 at 8:49 अपराह्न

    thnx Mahak..tumhari khabar to mili.
    apna khyal rakhnaa..


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