गिनती -कुछ बीते लम्हो की

बहुत दिनो से ब्लॉग पर् आना नही हुआ | कभी वक़्त होकर भी नही होता | लम्हे खाली होकर भी कुछ दूसरी चीज़ों से भरे होते है |
तीन-चार महीनो से यही हुआ है | हमारी नानी जी का दाये आँख का कॅटरॅक्ट (उमर की वजह से सफेद फूल पड़ना भी कहते है आँखों में) का ऑपरेशन हुआ |
मुंबई के बेहतरीन अस्पताल में | जैसे के इस ऑपरेशन के बाद दो-तीन घंटे में घर जाने मिल जाता है, नानी जी भी आ गयी |
तीसरे दीं से बहुत ज्यादा दर्द और आँख से पानी बहने की शिकायत थी | डॉक्टर की राय भी ली | वो कहते रहे के ये हो जाता है.चिंता ना करे | नाना जी को डायबेटिस की बीमारी होने पर् भी कोई पोस्ट ऑपरेटिव दवा नही दी गयी |
   जब तकलीफ ज्यादा हुई , सहने से बाहर , तब उन डॉक्टर साहब ने दिखाने बुलाया | जाच के बाद बताया के ऑपरेशन हुए आँख में गहरा इन्फेक्षन हुआ है,और आँख निकालनी पड़ेगी | जो डॉक्टर पहले फोन पर् ठीक से बात नही करते थे,अब उनकी वाणी कितनी मृदु हो गयी थी | इन्फेक्षन जो आख में हुआ था
वो महज़ ऑपरेशन थियेटर का ही था, जो की पथोलोजी जाच से क्लियर हो गया | शायद अगर पहले ही डॉक्टर चेक करते नानी जी को अपनी आँख नही गवानी पड़ती | ऑपरेशन से पूरी दाई आँख निकालनी पड़ी |  हम ही सब टूट गये थे, नानी के हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी |
    फिर बहुत सारा समय नानी की शुगर लेवेल कंट्रोल में रखने का प्रयास और उनकी टाइम पर् इन्सुलिन के इंजेक्षन देने में व्यतीत होता|
जब शुगर कंट्रोल हुई तो बाईं आँख का ऑपरेशन हुआ | इस बार दूसरे जगह करवाया | प्रभु की दया वो ठीक हुआ और नानी को अब थोड़ा दिखाने भी लगा है |
इस बात से हमे एक सीख मिली,हू भी डॉक्टर है,कभी कभी किसी पेशेंट का फोन आने पर् झल्लाहट हो जाती है | मानते है के हम तब बेहद ज्यादा थके होते है | मगर हम आगे प्रयास करेंगे के दिल में गुस्सा नही पनपे | जब खुद पर् बितती है तभी शायद इंसान समझता है |

इसी बीच दूसरा हादसा हुआ था | हमारे निचले फ्लॅट में रहनेवाली दादी जी सिधार गयी | उन्हे बहुत दिनो से दिल की बीमारी थी | उनके साथ हमने बहुत सारे लम्हे बिताए थे | उनका बेटा और बहू बहुत वक़्त जब काम से बाहर रहते,दादी और हम मिलकर सी-आय-डि या टॉम – ज़ेर्री देखते |
चाय के साथ कितने ही पार्ले-जी के बिस्किट खाते | वो अपने बचपन की बाते ,जवानी के किस्से सुनाती | हमारे बहुत उलझनो का हूल देती | दिल का रिश्ता था,सहेली का रिश्ता था, उन्हे खोकर बहुत कुछ खो दिया हमने |

अब धीरे धीरे वक़्त अपने पहिए संभालने लगा है |  और बहुत कुछ खोया हमने इन तीन महीनो में,मगर अब लिखना या याद नही करना चाहते |
आप सभी ब्लोग्गेर दोस्तों को हम नही भूले है | जिन्होने भी हमे याद किया उनका बहुत शुक्रिया | खास कर अल्प्नाजी (व्योम के पार)और आशाजी (स्वप्नरंजिता)  | यही हम  दिल की बात वाले डॉक्टर अनुराग और उड़न तश्तरी वाले समीरजी का भी शुक्रिया करना चाहते है | जब हमे जरूरत थी, इन दोनो ने हमारी बहुत मद्दत की |
आप सभी दोस्त हमे बहुत प्यारे है, सभी का जीकर नही कर पा रहे | जैसे भी आगे वक़्त मिलेगा ,सभी से मिलने की कोशिश और प्रयास करेंगे | तब तक अलविदा |

11 टिप्पणियाँ

  1. Kajal Kumar said,

    मार्च 13, 2010 at 12:27 अपराह्न

    यही शायद जीवन की धूप छांव है. अंत भला सो सब भला. समीर व अनुराग जी को मेरी तरफ़ से भी धन्यवाद.

  2. rashmi prabha said,

    मार्च 13, 2010 at 4:49 अपराह्न

    mujhe intzaar rahega is mehak ka

  3. alpana verma said,

    मार्च 14, 2010 at 7:25 पूर्वाह्न

    प्रिय महक ,इतने दिनों बाद तुम्हें देख कर बहुत ख़ुशी हुई.सच.!
    ——————–
    लेकिन नानी जी के ऑपरेशन और उस के बाद P.Op complications की सब बातें पढ़ी ,बहुत दुःख हुआ यह सब सुन कर.
    बहुत कठीन दौर था ..गुज़र गया.
    नानी जी को मेरी नमस्ते कहीये और मेरी प्रार्थना है कि जल्दी ही पूरी स्वस्थ हो जाएँ.
    ——————–
    दादी जी के लिए मेरी श्र्धनाजली है ..
    अपने जो नहीं थे मगर अपनों से बढ़कर थे.. उन्हें कभी भूल नहीं सकते.वो तो हमेशा यादों में रहते हैं.
    —-अपना ख्याल रखना..

  4. मार्च 14, 2010 at 7:58 पूर्वाह्न

    यूं तो इसी का नाम जीवन है. पर नानीजी के साथ जो कुछ हुआ वो अफ़्सोसनाक है, ओटी इंफ़ेक्शन के बारे में कम ही सुनने मे आता है. पर लापरवाही कहें या भाग्य की बात? आशा है अब नानीजी स्वस्थ होंगी.

    दादीजी को हार्दिक श्रंद्धांजली.

    रामराम.

  5. kshama said,

    मार्च 14, 2010 at 11:09 पूर्वाह्न

    Yahi zindagee kee dastan hai..jo seedhe dilse nikli…diltak pahunch gayi…ek aah ke saath..

  6. ramadwivedi said,

    मार्च 16, 2010 at 1:26 अपराह्न

    प्रिय महक जी,
    हमेशा मैं सोचती थी कि महक जी कहाँ हैं?पर मैंने यह नहीं सोचा था कि आप इतनी मुश्किलों से गुज़र रही हैं बस यही सोचती थी कि घर परिवार में व्यस्त हो गई होंगी। आज मन में आया कि आपके ब्लाग पर जाकर देखूं कि आप लिख रही हैं या नहीं लेकिन आपके नानी जी की तकलीफ एवं दादी का चले जाना पढ़कर बहुत दुख हुआ । नानी जी शीघ्र स्वस्थ हो जाएं यही ईश्वर से प्रार्थना है। दादी जी की आत्मा को शान्ति मिले ।
    ज़िंदगी में कभी ऐसे ग़म आ जाते हैं जो अन्तरात्मा को झकझोर देते हैं लेकिन यही ज़िंन्दगी है।आप साहस न खोएं और धैर्य से काम लीजियेगा ग़म हमेशा नहीं रहते यह समय भी निकल जायेगा …सस्नेह..

    डा.रमा द्विवेदी

  7. rohit said,

    मार्च 18, 2010 at 10:30 अपराह्न

    महक जी
    नानी जी के साथ हुआ हादसा और दादी का जाना ..काफी अफसोसनाक है….
    पता नहीं कहना चाहिए या नहीं, लिखते हुए काफी संकोच भी हो रहा है….वैसे आपने खुद ही निश्चच कर लिया है कि आईंदा पेशेंट का फोन न आने पर गुस्सा न होने की कोशिश करेंगी….महक जी हर मरीज जानबूझ कर डॉक्टर को तंग नहीं करता….ऐसे में एक की गलती की सजा कई को फोन न उठाकर, न दें,,,,कई लोग डॉक्टर को इसलिए कभी-कभी ही फोन करते हैं कि जाने किस वक्त वो किस की जान बचा रहा होगा, ऐसे में किसी का आपको फोन न आए तो आपका वो दोस्त या जानकार भी दोषी नहीं….आप हर तरफ से हारे इंसान के लिए भगवान होते हैं…बाकी क्या कहूं…..शायद कई सालों से देखता आ रहा हूं..इसलिए कह रहा हूं…मैं भाषण नहीं दे रहा….अगर कुछ ज्यादा लिख गया हूं तो क्षमाप्रार्थी हूं.

  8. Abyaz said,

    मार्च 19, 2010 at 7:03 अपराह्न

    महक जी.. मैंने कई बार आपके ब्लॉग पर विजिट किया.. लेकिन रब्बा भले.. के बाद कोई स्टोरी ही नहीं थी.. समझ में नहीं आ रहा था, कि आप अचानक कहां चली गईं.. चलिए अच्छा हुआ आप फिर से वापस आ गई हैं… नानी जी के साथ जो हुआ बहुत बुरा हुआ… दादी जी के लिए मेरी भी ढेर सारी दुआएं…

  9. मार्च 19, 2010 at 7:43 अपराह्न

    Dear Mehek,

    I used to come to your blog, and when I didn’t find any post here from you then I thought there might be some good news from your side so you are not getting time to write here. I feel sorry now after reading your post. I can feel your pain.

    With love and Regards
    Rewa Smriti

  10. mehek said,

    अप्रैल 5, 2010 at 12:05 अपराह्न

    aap sabhi ka hausla afzayi aur himmat bandhane ke liye bahut shukran.hame bahut jarurat thi iski,bahut dhanyawad.

  11. tailor preeti said,

    मई 7, 2010 at 9:00 पूर्वाह्न

    hamen aapse sampurn sahanubhuti hai ….ye daur se ham sab gujarte hai …par ek baat aur hai ki jo apni kalam ki duniya se juda hota hai vo apne har lamhe ko jeene ki himmat juta hi lete hai ….
    get well soon and well come back …


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