यकीन

 आज ना जाने खुद के यकीन पर् यकीन नही हो रहा | कभी यही यकीन दिल में डट के खड़ा रह जाता है ,एक मजबूत नीव बनकर ,चाहे तब हज़ारों तूफान आए , अपने हौसले और हिम्मत की रसियों से हमे वो बांधे रखता है | घने अंधेरों में रोशनी का नन्हा सा दिया बन जाता ,तो कभी मुरझाई ज़िंदगी में फूलों की खुशबू लेकर आता | कभी हमारे लिए वो खुदा तक अपनी दुवाए पहुँचाने की सीढ़िया रही . कभी अधूरी तम्मनायें पूरी करने की राह | गहराई में जाकर सोचा यकीन का मतलब क्या है ? खुदा का दूसरा नाम ही यकीन तो नही | जिसका अस्तित्व हम अपने हिसाब से बदलते रहते है | जब सब कुछ मन मुताबिक हो वो है,और जब नही तो वो भी नही | हमे एक मंज़र आज भी याद है ,जब खुदा है ये यकीन होता है | हम तब चौथी या पाँचवी कक्षा में होंगे | अपनी बड़ी चचेरी दीदी,जीजा और बाकी उनके परिवार समेत हाजीअली गये थे | मज़ार तक जाने का रास्ता बीच समंदर में बने पूल से गुजर कर जाता है | वापस जाते वक़्त तेज हवा के साथ उँची समंदर की लहरें पूल पर् से दौड़ने लगी | वैसे ही पूल चिकना था, हमारे हाथ दीदी से कब छूटा ,और हम समंदर में कब गिरे दीदी को भी पता ना चला | सब लोग जल्दी में भाग रहे थे | तैरना हमे आता नही था, हमारी आँखे अधखुली से मद्दत के लिए देख रही थी | ना जाने कहा से बस एक हाथ दिखा , कोई इंसानी शक्ल ना दिखी, हमारी आँखें अपने आप बंद हो गयी और दूसरे पल हम अपनी दीदी के बाजू में खड़े थे ,उनके पीछे | वो हाथ किसका था नही पता,पल भर में इतना लंबा पूल का रास्ता कैसे तय हुआ ये भी नही पता, मगर हां तब जो यकीन दिल में था के खुदा तू है ,वो सच्चा ,आज तक के उमर तक का सच्चा यकीन था | अब यकीन के मायने हर दिन के साथ बदलते रहते है | या यू कहे ,के यकीन उस पेड़ की तरह हो गया है , जिसके छाव तले रहने की आदत सी हो गयी है | जब उसके सारे पत्ते उड़ जाते है, धूप की जा सी किरण भी झुलसा देती है | ये तुझ पे उंगलियाँ क्यूँ उठ रही ख़ुदारा शायद तेरे वजूद पे यकीन न होता अब……………..

12 टिप्पणियाँ

  1. kshama said,

    मई 31, 2010 at 3:25 अपराह्न

    Bahut romanchak yaadgaar! Hamtak jo yah ‘Mahak” pahunchnee thee!
    Haji Aliki darga ko doorse hi dekha hai..kabhi pul par se guzri nahi..

  2. मई 31, 2010 at 4:48 अपराह्न

    yakin mein bahut takat hoti hai..

  3. alpana said,

    मई 31, 2010 at 8:44 अपराह्न

    लाख लाख शुक्र है खुदा का की तुम्हे कुछ हुआ नहीं ..सही सलामत समंदर की लहरों से पार लग गयीं महक .
    ****महक, इश्वर तुम्हें लंबी उम्र दे.यह तुम्हारा यकीन ही था उस परवरदिगार पर जिस ने तुम्हें डूबने से बचाया.
    वो है एक परमपिता/महाशक्ति ….. हमारे यकीन के रूप में हम सब में .!

  4. mehek said,

    जून 1, 2010 at 10:50 पूर्वाह्न

    sahi kaha aap sab ne wo yakin hi hai jis pe hamari zindagi chalti hai.na jaane kal yakin par se yakin hut kaise gaya tha………

  5. rashmi prabha said,

    जून 1, 2010 at 11:21 पूर्वाह्न

    kaun chhuyega uski parchaai , jisko bachanewala sai………lambi aayu de di haazi ali ne

  6. जून 3, 2010 at 1:34 अपराह्न

    Hmmm… Dear Mehek, jisper khuda hami ho use mita sakta hao koun!

    Aise hamesha khuda ka khudaya aapke sath rahe!

  7. ashish said,

    जून 12, 2010 at 6:24 पूर्वाह्न

    thik hai ………..par yaki ka dusra naam vishvas hai our vishvas ke bina jivan ki gadi ak pag bhi age nahi bad hakti………..vishvas khuda meho ya ram me ya jissh me sab ak hi bndhan hai………ab suno ak baat – vishvas ka shbdik arth vish + vas =mere andar + nivas , Arthat – ” Us shakti ka mere andar nivas” ko……………

  8. Asha said,

    जुलाई 12, 2010 at 2:08 पूर्वाह्न

    हमारा यकीन ही हमारा खुदा होता है । भगवान आपको लंबी उमर दराज करे ।

  9. Subhash said,

    फ़रवरी 4, 2011 at 8:38 पूर्वाह्न

    Hello mehak i am subhash from Almora/Jaipur i see ur page i like it.
    Mujhe bahut achha laga aapka blog padh kar meri aapse 1 request hai plz aap meri request par gaur zarur karna mein raja malushahi ki love story padhna chahta hu agar aapke pass unki koi story ho toh plz mere mail par aap send kar dena ….

    thanks

  10. mehek said,

    फ़रवरी 7, 2011 at 5:26 पूर्वाह्न

    well thanks for visiting but i don’t have the story u r looking for.

  11. dnyan said,

    मार्च 11, 2011 at 4:46 पूर्वाह्न

    muje bohat aacha lga i’mean mai aapko bta nahi skta pr aap aaisehi likhe ki jo hm sbko bha jaye thanks

  12. riya said,

    नवम्बर 20, 2011 at 5:42 अपराह्न

    mahak its very nice writing , you really rock
    thanks for sharing great stuff .


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