एक पुराना मौसम भीगा

दोस्तों में से ही किसीने ये कविता ईमेल से भेजी थी,हमे नाही कवी का नाम पता है,नाही ये कही और प्रकाशित हुई है क्या इस बात की कोई जानकारी ?बस मगर दिल को बहुत अच्छी लगी तो आप सब से बाट रहे है |
अगर किसी को इस कविता के लेखक के बारे में या और कुछ भी जानकारी हो जरूर बताए,आखिर सारा श्रेय उन्ही का है |

एक पुराना मौसम भीगा ,अनजानी बरसातों में
जाने लेकर कौन चला है , ओढ़ा बादल हाथों में |

इक मौसम में पतझड़ के दिन,इक मौसम में फूलों के
कितना सारा फर्क है आखिर ,तेरी ही सौगातों में |

अपनी आँखों में हर मंजर् , अब अनदेखा रहता है
कोई झील-मिल सी रहती है,ख्वाबों की बारातों में |

सब्र -आलम क्या होता है , यारो हम से पूच्छो तो
कतरा-कतरा शबनम चुनना, हिज्र की लम्बी रातों में |

5 टिप्पणियाँ

  1. shivangi said,

    जनवरी 27, 2011 at 12:07 अपराह्न

    simply awesome !

  2. फ़रवरी 10, 2011 at 6:56 पूर्वाह्न

    क्या बात है… बहुत दिन बाद आ पाया… पर बहुत आनंद आया…

  3. फ़रवरी 20, 2011 at 5:46 पूर्वाह्न

    मेहक, किती सुंदर कविता आहे ग . तुझ्या कमेंटस परत ब्लॉग वर वाचून सुख वाटलं . लिहीत रहा तुला वाचण्यात छान वाटतं खूप . मी पण परत आले फिरून आता .

  4. vijaymaudgill said,

    फ़रवरी 23, 2011 at 4:19 अपराह्न

    akhri share kahi bhitaar tak utar gaya. jisne bhi likhi hai masha allah. aur apne hame itni sundar rachna k ru-b-ru karvaya apka shukriya

  5. vijaymaudgill said,

    फ़रवरी 23, 2011 at 4:21 अपराह्न

    akhiri share kahi bhetar tak utar gaya. jisne bhi likhi hai subhan allah. aur apne itni sundar rachna k ru-b-ru karvaya apka shukriya.


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