साज-ए-दिल

साज-ए-दिल

मन की उथल-पुथल,लहेरे,हज़ारों ख्वाब , अनगिनत सितारो की बारात, मगर एक हसरत, एक ही ख्वाहिश
के तुम आओ ….
पहलेसा चुपके से पीछे से आकर , जकड़ो हमे, खुद की ,हमारी भावनाओ में भिगो और भिगाओ…
खामोशियाँ , तनहाईयाँ , आहटें और तेरी यादों के तराने इन सब को गहरी नींद सुलाओ…
बहुत कुछ कहना है दिल को, बेहद हसीन अरमान सजाए है उसने, उन्हे निभाने आओ…..
डरती हूँ कभी आवेश में आकर कुछ ज्यादा कह दिया और तुम बुरा न मान जाओ….
जैसे हमे कहना , वैसे तुम्हे भी कहना होगा कुछ, अपना दासता-ए-दिल सुनाओ…….
हम तुम मदहोश हो जाए,कोई साज-ए-दिल गुनगुनाओ…..

6 टिप्पणियाँ

  1. अप्रैल 7, 2011 at 7:08 पूर्वाह्न

    khubsurat ehsaas

  2. मीनाक्षी said,

    अप्रैल 10, 2011 at 10:16 पूर्वाह्न

    साज़ ए दिल बजता है तो कोई कोई ही समझ पाता है…बेहद खूबसूरत एहसास

  3. अप्रैल 25, 2011 at 2:09 पूर्वाह्न

    दिल की चाहत तो यही होती है कि दिलदार से रूबरू हों । सुंदर शब्दों में ढली भावना ।

  4. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 27, 2011 at 1:02 अपराह्न

    हम तुम मदहोश हो जाए,कोई साज-ए-दिल गुनगुनाओ…..

    Bahut sunder Mehek…ab mere sang tu bhi gaye ja….

    Aaj madhosh hua jaye re, mera man…
    Shararat karne ko lalchaye re mera man..

    rgds.

  5. जून 6, 2011 at 11:28 पूर्वाह्न

    wah valentine day firse aa gaaya hai wise to pyar ka koee din nahee hota kawitaa kee tarah behata hai ye gadya.

  6. सितम्बर 14, 2011 at 9:16 अपराह्न

    mehek kahan ho ?


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