सितारों की..

सितारों की रौशनी में
अक्सर
ढूंढते है तेरा चहेरा
शायद चाँद बन कभी तुम
निहारते होंगे हमे
तस्सली सी हो जाती है
दिल को
आज भी वो प्यार
अनजाना नही……………………….

7 टिप्पणियाँ

  1. digamber said,

    जनवरी 29, 2012 at 7:43 पूर्वाह्न

    बहुत खूब … चाँद बन उनकी आँखें निहारती हैं …
    कहीं मन को बहलाने का ख्याल तो नहीं … अच्छी रचना है …

  2. Kajal Kumar said,

    जनवरी 29, 2012 at 9:20 पूर्वाह्न

    ☺ सुंदर

  3. mehhekk said,

    जनवरी 29, 2012 at 12:13 अपराह्न

    shukran, ji shayad mann behlane ki koshih hi hai:)

  4. Rewa Smriti said,

    अप्रैल 20, 2012 at 6:53 अपराह्न

    Nice poem!

    Aajkal hamne chand ke sath sitaron se bhi dosti kar rakhi hai:)

  5. जून 20, 2012 at 10:50 अपराह्न

    बहुत सुंदर चांद बनकर ुनका मुझे निहारना, वाह !
    मेहेक, आप बहुत बार मेरे ब्लॉग पर आईं मुझे ही आने मे देर हो जाती है ।आपकी टिप्पणी से बडा अच्छा लगता है कोई अपना मिल कर गया हो जैसे ।

  6. amit said,

    जनवरी 24, 2015 at 1:02 अपराह्न

    so nice find to find someone like har

  7. अमित राणा said,

    मार्च 3, 2015 at 12:26 अपराह्न

    अतिसुंदर


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 32 other followers

%d bloggers like this: