आहट सुनने तरसती रहती हूँ

कभी बैठकर अकेली,मैं सोचती रहती हूँ
हर वक़्त किसे मैं खोजती रहती हूँ |

मेरे सारे अपने आसपास ही तो है
कौन गुमशुदा,जिसे तलाशती रहती हूँ |

घर लौटकर आए है सभी लोग
पलक बंद कर,किसकी राह देखती रहती हूँ |

जानती हू मैं, वो तुम हो सजन तुम
फिर भी तुमसे लुकाछिपी खेलती रहती हूँ \

जब तुम सच में छिप जाते हो कही
तेरी बस आहट सुनने तरसती रहती हूँ |

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