एक अजनबी

जान कर भी नही जानती 
समझकर भी नही समझती 

दूर से ही होती है अपनी मुलाकात 
नज़रो ही नज़रों में होती है बात 

तेरी हँसी ,मेरे लबो पर आए 
तेरे आँसुओं से मेरे नयन भर जाए 

महसूस करती हूँ सांसो को तेरी
तेरे ख़याल से ही,बढ़ती धड़कन मेरी 

ख्वाबो में रहते हो,छू नही पाउ कभी 
मेरे दिलबर हो तुम, फिर भी अजनबी .

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