ऐसी हर सहर कीजिए

ऐसी हर सहर कीजिए 

नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए 
दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए | 

पैगाममोहोब्बत भेजा है खत में नाज़निन
बुल हो  गर तोहफाइश्क़ हमसे नज़र कीजिए | 

खुशियाँ बाटने यहा चले आएँगे अनजान भी
किसी के गम में शरीक अपना भी जिगर कीजिए | 

आसान राहों से जो हासिल वो भी कोई मंज़िल हुई
खुद को बुलंद करने तय  मुश्किल सफ़र कीजिए | 

दुश्मनजहाँ के तोड़ रहे है मंदिर मज़्ज़िद
अपने गुनाहो की माफिएअर्ज़  अब किधर कीजिए | 

लहू के रिश्तों से भी मिले अब फरेब – खंजर
परायों से अपनापन नसीब वही बसर  कीजिए | 

ज़मीन समेट्ले बूँदो से वो बादल है प्यासा
आसमान झुके पाने जिसे  प्यार इस कदर कीजिए | 

गुलाब से सजाए लम्हे भी मुरझाएंगे कभी
यादों में उनकी “महकरहे ऐसा असर कीजिए |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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