हर कवि की कविता

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  हर कवि की कविता

हर कवि की कविता अनमोल होती है
कोहिनूर से भी ना उसका कोई तोल है |

कविता कवि के हृदय के बोल होते है
कोई खरीद नही सकता,ना उसका दाम,ना कोई मोल है |

कवि के जज़्बात जब पन्नो पर उतरते है
अलंकार और शृंगार से वो सजते है |

 कर जब कविता निखरती है
दुल्हन से ज़्यादा खूबसूरत लगती है |

रसिकगनो से जब उसे प्रतिक्रिया मिलती है
उसकी सुंदरता और भी रती है |

उसे दिल से,अर्थ से,भाव से,श्रव करे
इतनी इल्तजा,अनुरोध वो करती है |

कविता हर कवि की इज़्ज़त होती है
नासमझो के सामने प्रस्तुत,वो लज़्ज़ित होती है |

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