काग़ज़ पर उतर कर आ जाओ तुम

तुम्हे अपनी ज़िंदगी बनाना चाहते है
मेरी सांसो में आकर मिल जाओ तुम |

तुम्ही फूल मेरे जीवन की बगिया का
मेरे दिल में आकर खिल जाओ तुम |

तुम्हारी इनायत है ,के अभी मैं जिंदा हूँ
मेरी धड़कन में आकर समा जाओ तुम |

तुम्हारा नाम सदा गुनगुनाती रहती हूँ
मेरी होठों का संगीत बन जाओ तुम |

तुम्हे इस जिगर में जान बनाया है
मेरी काया में आकर ठहर जाओ तुम |

तुम्हारी इबादत आजकल मैं करती हूँ
मेरी दुआ आकर कबुल कर जाओ तुम |

तुमसे ही मेरे जीवन के रेशम तार जुड़े
मुझसे आकर गठबंधन कर जाओ तुम |

तुम्हे मेरी शब्दो की भावना में लिख दू
अब काग़ज़ पर उतर कर आ जाओ तुम |

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