चैन – ओ -अमन नदारद हुए

चैनअमन नदारद हुए कई दिल से
सुकून की घड़ियाँ नसीब बड़ी मुश्किल से |

वो खुद को तो कहते है बंदे खुदा के रही
और देते मासूमो को जख्म जलते कील से |

नन्हे  हाथों  में  बारूद – बंदूक  थमा दी  है
छिन किताबबस्ता मदरसे में जमील से |

राहरहमपैगाम हुआ रुखसत
सिखाते नोच खाना अपनो को गीदड़ चील से |

कब ख़ालसा होगा इनका या डरता है मौला
रहमतइंसानियत हो तेरी जादुई झील से |

Advertisements