तकदीर ने कुछ अनकहे फ़ैसले सुनाए

तकदीर ने कुछ अनकहे फ़ैसले सुनाए
कबुल कर उन्हे  सराखों  पर  लिये है |

ये दर्द छलक कही नासूर ना बन जाए
जख्म इस टूटे जिगर के सारे सिये है |

ये  सोचकर कही प्यासे  ना  मर जाए
जाम जहर  के हमने हंस कर पिये है |

जुदा होकर भी ,तेरी  खुशिया ही चाही
दुनिया की रस्मे रिवाज़ अदा किये है |

तुमने मोहोब्बत से कुछ पल ही चुराए
ज़िंदगी के पूरे लम्हे उसे हमने दिए है |

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