दस्तक सुनाई देगी

दस्तक सुनाई देगी

बंद करके दिल में अपने सपनो को,उमीद को
सालों साल एक ही राह पर चलते जा रहे
जो सामने अच्छा आया,उसे उठाया और
बुराई बाजू से गुज़री,तो अनदेखा कर गये
कम से कम मेहनत में,ज़्यादा फल कैसे पाए
सारी मन की शक्ति यही सोचने में लगा दिए
दुनिया नरक बनती जा रही है,घोर कलयुग
भगवान पर ही इल्ज़ाम,उंगली उठा लिए
पैसा पैसा,बहता दरिया,अपना हिस्सा भरलो
इस दौड़ में इन्सानियत की होली जला दिए
एक दिन सब बदलेगा सिर्फ़ कहते रहते है
खुद  बचकर रहेंगे,दूसरा बदलनेवाला चाहिए
कोशिश की चिंगारी सब  साथ जब सुलगाएँगे
इस जहा में तब ही सुनहरी रोशनी होगी
अंधेरो की किवाडो को खोलकर  सब निकलेंगे
तभी नयी सुबह होंने की दस्तक सुनाई देगी.

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