दिल जब चाँद बने

        बड़ी दुविधा में है आज हम | हमारा नाज़ुक सा दिल एक कोने रूठा बैठा है |
वजह पूछी रूठने की ,कहता है उसे ईर्षा हुई है,वो भी खूबसूरत चाँद से | अजी
हमारा दिल और ईर्षा तौबा,खूबसूरती से वो इश्क़ ज़रूर कर सकता है,मगर
ये उल्टा पानी आज कैसे बहने  लगा
             
खैर सबके मूड बदलते रहते है,शायद दिल भी | जिद्द कर रहा है वो चाँद
बनके ही दिखलाएगा | अब हमे तो दोनो से समान प्यार है,अपने दिल से भी और
मनमोही चाँद से भी | आख़िर हमारे मन ने फ़ैसला कर लिया वो इन दोनो के बीच
ना ही पड़े अच्छा है | आसमान में दिल चमके या चाँद ,वो दोनो ही हमारे अपने है |
बस एक इल्तजा आसमान से करेंगे….

 

 

 

 

 

हमारा दिल जब चाँद की जगह ले लेगा
आसमान
तेरा एक टुकड़ा उसे रहने को
दे देना
चाँदनी कही 
ये ना समझे के कोई अजनबी आया है