रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान

रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान
चाँद के बिन सितारे अधूरे  से लगते  है |

समंदर की गहराई में छुपाया जो खजाना
मोतियो  के बिन सीप अधूरे से लगते है |

इज़हार करने जाओ जो गमजमाना
आसुओ के बिन नयन अधूरे से लगते है |

महफ़िल में सजाओ जो गीतो का तराना
सुरताल  के बिन साज़ अधूरे से लगते है |

तुम हमे कितनी अज़ीज़ कैसे करे बयान
महक‘  के  बिन फूल अधूरे से लगते है |