शमा जलाकर हम बैठे है

हम सदा ही मुस्कुरा जाते है
आपके हर एक दीदार में |

मोहोब्बत के मोती पिरोए है
आपके हर लफ़्ज-ए- इज़हार में |

इश्क़   के   जाम  छलकते है
आपकी हर मीठि तकरार में |

सहर हमे तन्हा कर गयी है
आपके मिलन की खुमार में |

शमा जलाकर हम बैठे अब है
नयी शाम आने के इंतज़ार में |

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