हजीअली -मेरे मौला

हजीअली -मेरे मौला

चादर-ओ -फलक  से कीमती शामियाँ सजाऊँ
पहुंचे तुझ तक इबादत -ऐ -सफर दरमियाँ बनाऊँ |

ज़िंदगी से फलसफे सीखे बहुत मेरे मौला
रूबरू होकर तुझसे जहन की खामियां समझपाऊँ |

दुआएं मेरे अपनों के लिए कबुल कर मालिक
भुलेसे दिल दुखाये कभी हजारों माफियाँ मांगपाऊँ |

हजीअली -ओ -पीर  तेरे सजदे के करम से नवाज़
के वक्त-ऐ-दामन में हुई हमेशा गुस्ताखियाँ बताऊँ |

जहर -ऐ-गुबार मन में पैदा न हो “महक”
हर लब-ओ -गुलिस्ता पे मुस्कानों का आशियाँ बनाऊँ |

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