chandni

सावला सलोना रूप लेकर
जब आए रात की रानी
शामाल से आँचल पर उसके
बिखरी हुई सी चँदनी
देख कर उसकी शीतलता
मे मन ही मन मुस्कुराउ
सारी दुनिया भूल कर
अपने सपनो में खो जाउ
सोचती हूँ उस आँचल का
चुन कर एक किनारा
मे भी सब पर लूटाउ खुशियाँ
बनकर चमकता सितारा.

top post

Advertisements