khwaish

के झरोके  से झाकती और उठती
ख्वाहिशो की छोटी लहरें

हर दिन नया  लेकर आती है
देखती है ख्वाब संपूर्ण होने का
तितली सी बनती चंचल
पतंग बन आसमान में करती हलचल
कोई ख्वाहिश पूरी होती है
अपना नया चेहरा लेती है
बाकी बिखर जाती है
दिल के गलियारे में
गिरकर,हसती,खिलती फिर उमड़ पड़ती
नयी रूह लेकर
जुड़ जाती ख्वाहिशो के कारवाँ से
जो कभी थमता नही….

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