माचिस की वो तीली

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बहुत कुछ कहना चाहता है दिल ..ये अचानक चलते चलते सफ़र में …हम दोनों में दूरियाँ कहा से आ गयी ..

कभी तुम कहते,कभी हम कहते …शायद दोनों ही कहना कुछ चाहते ..और उन लफ्जों का अर्थ ..तर्क हम अपने

हिसाब से लगा लेते थे …एक दीवार बन गयी है ..न टूटने वाले ख्यालों की ..या अहम् की ..या किसी मज़बूरी की …

रोज ही कितने पल साथ साथ गुजर जाते है…मगर सारे खामोश….कोई रौनक नहीं उन में….राह के एक ही किनारे पर दो अजनबी टहलते है …कुछ खोजने की कोशिश करते हुए,..क्या खोया यही न मालूम मगर…..

पुल पर चढ़कर ..निचे से बहती नदिया की कल कल संग …दिल की तरंगों को बहने के लिए छोड़ देते है…

एक तरंग से दूजी तरंग मिलती है…..और उलझने और बढती जाती है …दो हाथ नजदीक है… थामने के लिए पहल करने हिचकिचाहट …

चाँद को ताकती चार निगाहें …वो मुस्कुराता है बस….मद्दत की उम्मीद मुझसे मत रखना ….ये चांदनी की छत्

ओढा दी है आसमान पे…..इन में खोज लो कोई जज़्बात मिले देख लेना..अपने आप ही …

क्या महसूस नहीं होता तुम्हे अब ..हमारे दिल का संगीत …वही धुन आज भी लय में थिरकती है …इश्क है तुमसे ….पहेला सा ही …..लाख कोशिश करूँ कहने की ..ये जुबान को किसने रिश्वत दी न जानू……

इस खामोशी को टूटना होगा ….हमारे लिए ….बस इंतज़ार है उस लम्हे का ….जो मन की कड़वाहट को पिघला दे..

रौशन कर दे ..वो बुझी शमा की लौ …पर माचिस की वो तीली कौन बनेगा …तुम या हम…..

समझ में आए किस्मत की बात है

रब के कुछ इशारों की जुबान नहीं होती |

saathi re

साथी रे

मेरे हम सफ़र,मेरे हम कदम
जब तेरा साथ हे यहाँ
मेरे सनम,तुमसे ही हे
खूबसूरत मेरा ये जहाँ
सपनोसे सजीला हो अपना आशियाँ
प्यार से भरी हो तेरी मेरी ये दुनिया
अगर कभी आए कोई तूफान
मिलकर करेंगे हम सामना
कभी ना बिछड़े अपना साथ
दिल में लिए ये कामना
चलती रहूंगी संग तेरे में
ज़िंदगी की ये अनगिनत राहे
चाहूं बस अब इतना ही
साथी रे तू भी ये कसम निभाए.