wo sham

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चाहत है उस शाम की
जब हो सिर्फ़  हम और तुम
हाथों में हाथ लिए
एक दूसरे में हो जाए गुम
मदमस्त करता हवा का झोका
और नीले झील का किनारा
चंदा संग चँदनी की किरने
बन जाए हम एक दूसरे का सहारा
होठों से कुछ ना कह कर भी
नज़रों ही नज़रों में सब कहना
दिल की राहों पर चलते हुए
मन ही मन मुस्कुराते रहना
सिर्फ़ कल्पना से ही बस
धड़कने हो जाती है तेज़
अब मुझे इंतज़ार हैूस शाम का
सजेगी तेरे मेरे अरमानो की सेज