यमुना के तट पर

यमुना के तट पर
गोपियों का जमघट
वस्त्राभूषण रख कर
जलक्रीड़ा करती सब.
नटखट कान्हा आए
छुपता दबे पाव तब
देखे गोपिया है मगन
शरारत करने मचला मन
वस्त्राभूषण के साथ
एक पेड़ पर छिप गया
बहोत देर बाद
गोपियों के ध्यान आया
कान्हा को सब पुकारती
वस्त्राभूषण वापस दो कहती
हम सब बाहर कैसे आएँगी
नंदनवन वापस कैसे जाएँगी
कान्हा बोले मैं मान जाउ
पर अपनी एक शर्त मनाउ
यशोदा मैय्या से शिकायत ना करना
चाहे जितना मैं माखन चुराउ
मंज़ूर कह गोपिया शरमाई
नन्हा कान्हा,पर धूम मचाई.

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