उमस भरी दोपहरी में

उमस भरी दोपहरी में
गर्मी की चादर ओढ़े धूप टहल रही थी
वो बादल का टुकड़ा आया
झाक के देखा उसने, आँखों के सूखे मोती
दौड़ा भागा , कुछ आवाज़ लगाई
लू से भारी हवा ठंडक बन लहराई
छाव का शामियाना धरा पर सज़ा
हज़ारों बादलों का जमघट जो लगा
टापुर टापुर बूंदे बड़ी बड़ी झूमको सी
राह पर गिरती , माटी से मिलती
खिड़की खुलने से पहले ही
नयनो के रास्ते मन बाहर था
आवारा बरसातो में भीगता
धूल गया पूरा के पूरा
चमकता नयी कोरी स्लेट सा
नयी हरियाली के उगम में
खुद को समेटता……….

Advertisements

बदरा दीवाने

Image and video hosting by TinyPic  

 

जानते हो तुम कितना गहरा असर होता है तुम्हारा हम पर
तुम बरसते हो कही दूर और हरियाली इस पार छा जाती  है|

 

 तपती बिलखती धरा मनाए नही मानती किसी की बात
सिर्फ़ तुम्हे देख  बदरा दीवाने उस पे मुस्कान आती है |

 

क्यूँ अकेला छोड़ उस को तू मुक्त विहार करता फिरता है
तेरा धरा से बूँदों का संगम जब होता खुशहाली लाती है |

बादल मितवा

राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण
ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन

नही सुने जाते जमाने के ताने
उस पर  आने के तेरे लाख बहाने

आँखें है बंजर ,कैसे नीर बहाए
सुलगती किरने आकर तनमन जलाए

तुझसे मिलने करूँ सागर का मंथन
धरा हूँ , मुझे है उड़ने का बंधन

ब्रम्‍हांड में पूरे तेरा है विस्तार
मुक्त अकेला ही करता है विहार

सुन रहे हो क्रंदन मत सता रे
कुछ लम्हो की साँसे अब तो आरे

मोहोब्बत का वास्ता तुझे धड़कन पुकारे
बादल मितवा प्यार की बूंदे बरसा रे.