दिल के जज़्बात

   

 हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम
लिख देते है दिल के जज़्बातों को
खुद के  ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभी कच्चे से लगते है |

कल्पनाओ को मन के नया रूप मिलता
जी लेते है अपने उन सिमटे ख्वाबों को
भावनाओ में बहेते तरंग कभी झूठे ,कभी सच्चे से लगते है |

अक्सर निकलती वो मोहोब्बत की बातें
कभी दोहराते मजबूत ,बुलंद इरादों को
हम चाहे जो भी लफ्ज़ पिरोए,मन  को अच्छे ही लगते है |

बहुत अरमानो से सजाते और सवारते है
बेंइन्तहा चाहते है अपनी कविताओं को
जैसे हर मा को सबमें खूबसूरत अपने बच्चे ही लगते है |

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मैं कविता लिखती हूँ

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  मैं कविता लिखती हूँ

लोगो ने मुझसे पूछा,तुम ऐसी कैसी हो
बाहर से पिघला मक्ख,अंदर से मो जैसी हो |

इतनी कोमल भावना,तुम कैसे रखती हो
अनजान के दर्द में भी तुम सिसकती हो |

इस नश्तर जहा में,गर कदम तुम्हे रखना है
खुद के पैर जमाने,सशक्त तुम्हे दिखना है |

अभी इसी वक़्त तुम खुदको बदलो आज
नये जमाने में चलन का,हम तुम्हे देते राज़ |

मैं मृदुभाषी ,सबको हसाती रूलाती,कला की दासी
शोहरत का मोह नही,दो मीठे बोल की प्यासी |

जवाब में सबको मैं क्या और कैसे बता
कोमल हृदय की स्वामिनी,सबको कैसे समझा |

हमेशा मृदु मुलायम रहूंगी,खुदको बदल नही सकती हूँ
एसी इसलिए नज़रा,क्योंकि मैं कविता लिखती हूँ |

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एहसास

एहसास

एक भावना,एक माध्यम है 
कुछ पाने और कुछ खोने का 

कभी ना कर सकी इस भावना का इज़हार 
और ना ही कभी किया है इंतज़ार 

एसे ही उमड़ पड़ता है 
जब कोई चीज़ बहुत हो ज़्यादा,या बहुत कम 

दबे पाव आए , आहट भी ना होये 
बस एक हलचल महसूस करता है 

गम और खुशियों से मिलन करता है 
जुड़ ज़्याता है मन से, ज़िंदगी में ,ये अहसास 

मेरी ही भावना मुझे थमाता है
और अनकहे ही चला ज़्याता है, ये अहसास