मोहोब्बत की वादियों में

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मोहोब्बत की वादियों में
तेरे साथ चलते हुए सफ़र आसान है
सोचती हूँ हम दोनो दिल से जुड़े 
अलग पहचान कहा हमारी
ना जाने अचानक तुम
कहा गुम होते हो
हमारे साथ होकर भी तन्हाई
खोजते हो ……..
ऐसा क्यों .? हमे बताओगे
इसका जवाब दे पाओगे ….

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जुगनू बन कर जागता है कोई

काली घटाओं के पर्दे से झाकता है कोई 
अध खुले उन नयनो से ताकता  है कोई |

हम तो अनजान बन गुजर जाते मोड़ से
बावरा ये मन क्यों काफिर भागता है वही |
दर्पण से कुछ पूछू वो जवाब नही देता
मालूम नही चल रही क्या रास्ता है सही |
  

 

 

 

 

 

गवाह –दिल कहते मिली उनको मंज़िल
उस अजनबी रूह से अपना वास्ता है कोई |


 

 

 

अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

शाम सुहानी सी

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शाम सुहानी सी

धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल
गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर सरका आँख का काजल |

ठंडी हवाओं का नज़दीक से गुज़रना नस नस में दौड़ती सहर
आँधियों का हमे अपने आगोश में लेना दिल में उठता कहेर |

उसी राह से हुआ तेरा आगमन ,एक छाते में चलने का निमंत्रण
नज़दीकियों में खिला खिला मन फिर भी था खामोशी का अंतर |

यूही राह पर कदम चले संग तुम्हारे कभी ना आए वो मंज़िल
बड़ी अजीब सी चाहत ,ख्वाब होते गजब के जो इश्क़ में डूबा हो दिल |

दरवाज़े तक तेरा हमे छोड़ना और मुस्कान में कुछ कोशीशन कहेना
समझ गया दिल वो अनकहे अल्फ़ाज़ और चलते हुए तेरा तोडसा रुकना |

हमशी  कह दू राज़ की बात ,ज़िंदगी की सब से थी  वो शाम सुहानी सी
रब्बा  शुक्रा में जीतने सजदे करूँ कम है उस  वक़्त तूने दुआ कबुल की |

तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम – ज़िंदगी

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तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम वरना तो सब अधूरा 
यही लफ्ज़ बार बार मूड कर हमसे ज़िंदगी कहेती है | 

 

 

सुनो तुम मेरा गीत और मैं तुम्हारी धड़कन में बस जाउँ
बन जाए ऐसी धुन जिस में जीवन की नदिया मिलती है | 

 

 

साँसों में उसकी खुशबू घुली सी , ज़ुबान पर बन मिठास
आँखों में नमकिन सा पानी का झरना बन के रहती है | 

 

 

वैसे  कदम से कदम मिलाकर चलती ,पल पल का बंधन
जब  ज़रूरत महसूस होता साथ,तो  नज़रों से छिपती है | 

 

 

पशेमा पशेमा हो ये मन ढूंढता है उसे अंधेरो उजालो में
किसी कोने से झाकति ,मंद मुस्काती खिलती,बहती है |

 

 

 

 

 

 

 

 

उस गली के मोड़ पर

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तेरे दर्द में सनम हम रह लेंगे 
इश्क़ में हुए हर सितम सह लेंगे 
दूर ही सही मगर दिल के करीब हो 
तेरे आने की आस है खुद से कह देंगे  |

———————-

अक्सर सवाल करते हो किस बात में छिपी है खुशी हमारी
इतना  समझ पाए अपनी तो जन्नत है मुस्कान तुम्हारी |

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संगीन गुनाह हुआ है  हमसे जमाने की नज़र में
कहते है कम उमर में  कैसे तुमसे इश्क़ कर बैठे  |

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बहुत संभ कर ही चलते है राहसफ़रकदम
उस गली के मोड़ पर यकायक तुमसे टकरा जाते है |

बूँद में छीपा अस्तित्व

बूँद में छिपा अस्तित्व ढुंढ़ो तो मिल जाए
बूँद से मिलती आशा  सब की प्रेरणा बन पाए |

बूँद विश्वास की गहरे रिश्ते की नीव रचाए
बूँद प्यार की मिठास घोले नफ़रत के शूल मिटाए |

बूँद सा छोटा शब्द  भावनाओ को राह दिखाए
बूँद ही  खुशी और गम में आँखों को सजाए |

बूँद थिरकती पत्तियों पर जश्नसाज़ सुनाए
बूँद बूँद मिलकर बनता विशाल सागर सा समुदाय |

अभिलाषा

गर्भ कोष की गहराई में
एक बीज आकार ले रहा
हौले हौले जोड़ रहा है
सवेदना की पंखुड़ियों को
खूबसूरत कली पर अपनी
किसी की नज़र न पड़े
इसलिए अंधेरे के जाल बुनता है
पता नही कैसे खबर मिलती है
उनको,शायद महक पहुँचती होगी
झुंड में आजाते है मिलकर
नोचने ,खरोचने को
असंख्य वेदना,दबी चीख
और लहू के  नदी बहती है
खून की होली खेलने का आनंद
हर चेहरे पर साफ लिखा
गर्भ खामोश,एक सिसकी भीं
नही भर सकता,
एक ही अभिलाषा थी  मन में
उसका फूल खिलता,
पूरे जहाँ को चमन बनाता
वो लहू का लाल रंग ही
अनगिनत खुशिया लाता
मगर उसने सोच लिया है अब
और नही ज़ुल्म सहेना
बंद कर लिए है अपने दरवाज़े
तब तक नही खुलेंगे
जब तक अपनी बेजान पंखुड़ियों को
जीवन दान देकर सशक्त चमन का
निर्माण न कर ले….

सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है

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तुम्हे देख  हमनशी कदम खुद  खुद चलते है
बड़ी मुश्किल से जज़्बादिल हमसे संभलते है |

मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे
महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच  निकलते है |

अंधेरों का ख़ौफ़ नही रहा जिगरजान को हमारी
मोहोब्बत के गवाहचिराग रौशन होके जलते है |

महबूबआफताबजहन के राज़ –ख़यालात यहाँ
वो भी महजबीदिलकशी से मुलाकात हो मचलते है |

फलकआईने से निगाहे निसार  नही होती गुलशन आरा
आपकी आरज़ू में झिलमिल सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है. |

खुदा-ए-अज़ीज

खुदाअज़ीज तेरे दर पे एक ही बड़ी चादर चढ़ाउँ तो काफ़ी होगी 
वक़्त के साथ तुझसे माँगनेवालों की दुआओं की फेहरिस्त लंबी होगी |

न जाने क्यों

 जाने क्यों

वो ये कैसे सोच लेता है के
उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है
साथ होकर भी तरन्नुमखामोशी का साज़
हमे हरदम नागवारा लगता है
कहेने को बीच में अनगिनत बातें राह देखती
वो बस कभी आसमान  को कभी हमे तकता है
हालातआलम बदलते नज़र नही आते
छेड़ो ना वही आलाप जो रूह में बसता है
 जाने क्यूँ डरती हूँ तुमसे आशिक़ –हयात
अनकहा सा ये लम्हा रेत सा फिसलता है |

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