हाल-ए-दिल

हालदिल बयान कर रहे थे जब हम अपना
पाकमोहोब्बत है तुमसे ये मान लिया होता |
किसी भी हद्द से गुजर जाने का जुनून सवार
दावा सच्चा है हमारा कोई इम्तेहान लिया होता |
तेरे आने से पूरे हुए बहुत से अरमान हमारे
कितने रह गये बाकी ये जान लिया होता |
दिल में कभी  जगती वो तन्हाई की हसरत
भीड़ में गर तुमने हमे पहचान लिया होता |
 

 

 

 

Advertisements

एतबार है हमे ज़िंदगी

एतबार है हमे ज़िंदगी

ज़िंदगी  जब से रूबरू हमसे हुई है
ख़यालो के तूफान थमसे गये है अभी |

पहले तो हवा का कोई रुख़ ना था
कश्ती को इक नयी दिशा मिली है अभी |

असीम आसमा में उड़ते हम खो गये थे
कदम खने एक नया क्षितीज मिला है अभी |

पतझड़ का मौसम रुखसत ना होता था
गुलिस्ता में बस बहार है पल पल अभी |

मायूसी को डिब्बी में बंद कर दिया है
मुस्कानो की लड़िया फुटती है सदा अभी |

उत्तार चढ़ाव तो आते जाते ही रहते है
संभलकर चलना सिख लिया है अभी |

मनचाहा मोड़ आएगा,यकीं है खुद पर
सही राह चुनेगी एतबार है हमे ज़िंदगी पर |

top post

हर कवि की कविता

1429907868_9269e01042.jpg 

  हर कवि की कविता

हर कवि की कविता अनमोल होती है
कोहिनूर से भी ना उसका कोई तोल है |

कविता कवि के हृदय के बोल होते है
कोई खरीद नही सकता,ना उसका दाम,ना कोई मोल है |

कवि के जज़्बात जब पन्नो पर उतरते है
अलंकार और शृंगार से वो सजते है |

 कर जब कविता निखरती है
दुल्हन से ज़्यादा खूबसूरत लगती है |

रसिकगनो से जब उसे प्रतिक्रिया मिलती है
उसकी सुंदरता और भी रती है |

उसे दिल से,अर्थ से,भाव से,श्रव करे
इतनी इल्तजा,अनुरोध वो करती है |

कविता हर कवि की इज़्ज़त होती है
नासमझो के सामने प्रस्तुत,वो लज़्ज़ित होती है |

top post

बेवफा हम भी नही

बेवफा हम भी नही

मोहोब्बत की राहों पर आज हम साथ नही
कसमे जो खाई थी , उनमे कोई बात नही |

गुजर गयी कायनात,दिल में ज़ज़्बात नही
इतनी तोहमते लगाई तूने,एक और इल्ज़ाम सही |

तेरे चेहरे पर हुज़ूर , जुदाई का गम भी नही
वफा तू ना निभा सका तो क्या,बेवफा हम भी नही |

हाइकू – सवेरा

हाइकू – सवेरा

1. पंछीयो की किलबिल
    सूरज निकलते ही
    घरौंदा छोड़े

2. चाँद छुप गया
    चँदनी खो गयी
    अधूरे स्वप्न

3. दव की बूँदे
    फूल खिले है
    महेकती ताज़गी

4. घना सा कोहरा
   पत्तियों का जाल
   चमकी किरने

5. अरुण रथ दौड़ा
    एक नया दिन
    रौशन जहाँ

6. अख़बार के पन्ने
    चाय का प्याला
    तरोताज़ा दिन

7. प्रभु का नाम स्मरण
    शंख का नीनाद
    आशीर्वाद पाए

8. रंगो की चुनरी
    अंबर भी शरमाये
    भोर हुई

9. भीगे है गेसू
   गालो पे लट है
   मनमोहक अदा

10. काम पे जाना
    अपनो से दूर
     ज़िंदगी है

शब्दांचे आंगण

शब्दांचे आंगण किती निराळे 
शब्दांचे जग एकदम वेगळे 

शब्दांच्या घरात मी पण रहाते 
शब्दान मधूनच आपल्या भावना पहाते 

शब्द  कधी असतात जुई सारखे नज़ूक 
शब्द कधी असतात दगडा सारखे कठोर 

शब्ध कधी होतात ओसाड  रान
शब्द कधी हिरवे,कधी पिवळे  पा

शब्द कधी हळूवार वाहणारा झरा 
शब्द कधी टप टप पावसाच्या गारा 

शब्द सुरांचे,सगळ्यांना हवेसे 
शब्द बोचरे ,एकने पण नकोसे 

शब्दांचा सुशोभित बाण,जपुन वापरावा 
शब्दाने घायाळ कोणी,निर्माण करतो दुरावा 

शब्द आपले दुसर्यांच्या हृदयात फुलावे 
शब्ढ साखर दुधात मिसळून बोलावे. 

खत लिखने की रस्म निभाई है

खत लिखने की रस्म

नयनो में ये घटा,आज फिर घिर आई है
खुशियों की बरसात बिन मौसम लाई है |

डाकिया कितने दिन बाद,दहलीज़ पर आया
दूर परदेस से, सजन का खत सन्देस लाया |

खत जब खोला तो, सारे गुलाब के फूल है
खत सिर्फ़ काग़ज़ नही,मेरे यारा का दिल है |

हर लफ्ज़ से उनका प्यार महकता है
दीदार-ए-इंतज़ार का गम छलकता है |

उनका खत पढ़ने में हम मसरूफ़ हो गये
याद करते वो अक्सर,हम महफूज़ हो गये |

जवाब-ए-तखलूस में हमने काग़ज़ कलम उठाया
कोरे पन्नो पर अपने अश्क का मोती बिछाया |

लिखे है हमने भी ,अपने दिल के सारे ज़ज़्बात
काटे है कैसे दिन और वो अकेली सुनी रात |

कभी ना कहना फिर, के हम हरजाई है
ये खत लिखने की रस्म,हमने भी निभाई है |

top post

हाइकू- प्रकृति

हाइकू- प्रकृति
1.बहती हवाए                                                     
  लहराते हरेभरे खेत
   चंचल मन

2.कोयल की कुक
  दिल में मिठास
  सुरीला गीत

3.नदिया की धारा
  सागर मिलन की उमंग
  लंबे रास्ते

4.हरियाली छाई
  धरती सजी है
  नया अंकुर

5.तितली फुलो पर
   रंगबिरंगी समा है
   मधु चुनती

6.भंवर की गूंजन
   खूबसूरत फूल ढूँढना
   छुपना है

7.सूरज की लाली
   गालो पर मेरी
   शर्माउ मैं

8.नीला आसमान
  चारो दिशाओ में अस्तित्व
  विशाल हृदय

9.परबतो की बस्ती
  उँचाई को छुना चाहे सब
   पत्थेर दिल

10.प्रकृति दुल्हन बनी
     अंतरमन प्रसन्न हुआ
     मुस्कान खिली
 
 

मुस्कुराहट के गुलाब

मुस्कुराहट के गुलाब

मुस्कुराहटसे सजे जो लब , नूर-ए-शबाब खिले है
एक मुस्कुराहट में हमारी , हज़ारो गुलाब मिले है |

हमारी मुस्कुराहटसे सबको , नशे चढ जाते है
कोई होश में आने से पहले, हम फिर मुस्करा लेते है |

मुस्कुराहट को एक बार तू चख ले जाहिल
जहर-ए-जाम भी ये अमृत बना देते है |

उठो उठो गोपाला

उठो उठो गोपाला

पूरब में अरुण रथ आया ,लेकर किरनो का उजाला
भोर हुई अब , उठो उठो गोपाला, मेरे नंदलला |

जाग उठी है धरती सारी,जाग उठा चौपाला
जागो तुम भी , उठो उठो गोपाला,मेरे नंदलला |

दूध की नदी बहे , जागी है गौशाला
बाट देखे गौमता,उठो उठो गोपाला,मेरे नंदलला |

यशोदा मैय्या बनाए ,दही मक्खन का काला
ढूँढ रही तुझे,उठो उठो गोपाला, मेरे नंदलला |

हाथों में मेरी पूजा थाल सजी और जपमाला
दर्शन दे अब ,उठो उठो गोपाला,मेरे नंदलला |

« Older entries