बूंदो की खनक में

 

बूंदो की खनक में
 ढूँढती हूँ अक्सर
वो छुपा हुआ अक्स तेरा
तुम भी जब खिलखिलाते
जैसे छम छम बूंदे
बजती थी |

बरसात की बूंदे
हथेली पर् लेकर
एक कोशिश करती हूँ
उन्हे छुपाने की
ताकि बहते पानी संग
तुम भी न बह जाओ |

बूँद में तुम्हे देखना
खयाल अच्छा लगता है
जितनी बूंदे होती है
तेरी उतनी ही तस्वीरे |

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बूँद में छीपा अस्तित्व

बूँद में छिपा अस्तित्व ढुंढ़ो तो मिल जाए
बूँद से मिलती आशा  सब की प्रेरणा बन पाए |

बूँद विश्वास की गहरे रिश्ते की नीव रचाए
बूँद प्यार की मिठास घोले नफ़रत के शूल मिटाए |

बूँद सा छोटा शब्द  भावनाओ को राह दिखाए
बूँद ही  खुशी और गम में आँखों को सजाए |

बूँद थिरकती पत्तियों पर जश्नसाज़ सुनाए
बूँद बूँद मिलकर बनता विशाल सागर सा समुदाय |

तेरे होने का एहसास

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नींद की लहरों में
ख्वाबों के समंदर से उठ कर

रौशनी की चाह जगाता हुआ

चमचमाती चाँदनी शुभ्रा सा

घुलता है मन के गहराई में

तेरे होने का एहसास

ऑस की बूँदों में
मखमल की पंखुड़ियों पे खिल कर

खुद में ही भिगता हुआ

गुलाब से लम्हो को जीता

मिलता है दिल के साज़ में

तेरे होने का एहसास