तुम्हारा प्रतिबिंब उतार लेती हूँ

सावन  के पानी में छप छप करना

किसी के मुख मुस्कान वास्ते जानबूझ

 कीचड़ में फिसलना

वो हर्ष के धब्बे  उठे मौजूद है

मन की काँच पर आज भी

 

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दूर नभ में स्थित हो

मन मचलता है तुम्हे पाने

थाली में पानी सजाकर

तुम्हारा प्रतिबिंब उतार लेती हूँ

उस में खुद को निहार के

चाँद और हमारा अक्स

ऐसे ही मिला लेती हूँ…..

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मन की आशायें

मन की आशायें भी
बड़ी अजीब होती है
शाम ढलते ही नीम तले
जाकर खड़ी हो गई
सोचती है गर टहनी टूटी तो
उसपर बैठा चाँद
उनकी झोली में गिरेगा |

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कल हमने चाँद को देखा
बादलों की चादर से झाकता ,मुस्काता
,फिर छुप जाता
बार बार यही हरकत दोहराता
शाम ढल रही थी वही
सूरज डूब रहा  था दूसरे छोर
निशा की पायल खनकी
मगर वो शरारती बाज ना आया
हमसा ही कह रहा था
सोने दो ना और पाँच मिनिट बाकी है
रात होने में अभी….

दिल जब चाँद बने

        बड़ी दुविधा में है आज हम | हमारा नाज़ुक सा दिल एक कोने रूठा बैठा है |
वजह पूछी रूठने की ,कहता है उसे ईर्षा हुई है,वो भी खूबसूरत चाँद से | अजी
हमारा दिल और ईर्षा तौबा,खूबसूरती से वो इश्क़ ज़रूर कर सकता है,मगर
ये उल्टा पानी आज कैसे बहने  लगा
             
खैर सबके मूड बदलते रहते है,शायद दिल भी | जिद्द कर रहा है वो चाँद
बनके ही दिखलाएगा | अब हमे तो दोनो से समान प्यार है,अपने दिल से भी और
मनमोही चाँद से भी | आख़िर हमारे मन ने फ़ैसला कर लिया वो इन दोनो के बीच
ना ही पड़े अच्छा है | आसमान में दिल चमके या चाँद ,वो दोनो ही हमारे अपने है |
बस एक इल्तजा आसमान से करेंगे….

 

 

 

 

 

हमारा दिल जब चाँद की जगह ले लेगा
आसमान
तेरा एक टुकड़ा उसे रहने को
दे देना
चाँदनी कही 
ये ना समझे के कोई अजनबी आया है

 

मुट्ठी भर चाँदनी

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1.मुट्ठी भर चाँदनी

पहेले रोज़ खिड़की पर आता था
रात रात हमसे बतियाता था
भोर की रश्मि आने पर भी
हमे  छोड़ के जाता था
आज कल हमे देख कर
बादलों के पीछे छुप जाता है
अक्सर नज़र भी नही आता है
कोई गुनाह तो नही हुआ हमसे?
एक बार बस रात को रौशन करने
मुट्ठी भर चाँदनी ही तो
उधर माँगी थी चाँद से…….

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 2.चाँद के रूप

पौर्निमा की रात 
चाँद को
शर्मा कर खिलते हुए
मंद मुस्काते हुए
पूरी दुनिया ने देखा होगा
अमावस पर 
चाँदनी के बिना 
अकेले में रोते हुए 
उसे सिर्फ़ हमने देखा है |

लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा

त्रिवेणी

1.लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा हालदिल सुनाया
उनके लबों की मुस्कान देख समझे हमने उन्हे मनाया
वाह वाह कह वो निकल गये हमे ग़लत फ़हमी हुई बताया

2.जाम हाथों में लिए वो पीते रहे रात भर
उनके साथ साथ हम भी नशे में है
निगाहों से पिलाने का यही असर होता है

3. ख्वाबो के पर लगा कर उड़ान भरली
ठिकाना तेरा ढूँढ ने में बड़ी देर कर दी
अब तो ना ज़मीन के रहे ना आसमान के.

4.दीवाना दिल मेरा जानता ही नही
तुझे मोहोब्बत नही हमसे ये  मानता ही नही
इसको क्या सज़ा दूं तुम ही तय कर लो.

5.चाँद रोज तुम खिड़की से क्यूँ  झाकते हो
साजन संग प्रीत छेड़ू तब क्यूँ निकलते हो
छुपने का इशारा  समझो इतने नादान तो नही हो
.  

गुलदस्ता – मोहोब्बत का(valentine)

 

गुलदस्ता – मोहोब्बत का

[1]
फ़िज़ा के रंग कुछ सवरने लगे है
हवाओं के रुख़ कुछ बदलने लगे है
सुस्त सी सर्दियों पर बिछी सूरज की रश्मि
दिल में तम्मनाओ के काफिले निकलने लगे है
मौसम में छाई है बसंती बहार
मंन में सज रहा मोहोब्बत का खुमार
पपिहरा नये गीतों से वादियाँ चहेकाना तुम 
सावरिया आए मिलन जब,ये राज़ किसे ना बताना तुम |

[2]

मोहोब्बत ये तुम्हारी हमारी
सदियों सी हो चाहे पुरानी
इतने अरसो बाद भी सजना
हम हर लम्हा बुनते नयी कहानी
बरकरार रखी है वही खुमारी
बावरी मैं हूँ तेरी दीवानी
तुम संग जो चली हूँ राहइश्क़
खुद को समझू सबसे सयानी. |

[3]

मोहोब्बत की घड़ियाँ ज़िंदगी में आए
सारी कायनात बदल ने का दस्तूर है |

इंसान को मसीहा का तसवुर दिया
इतना गहरा मोहोब्बत का सरूर है |

आस पास का सब कुछ बेमानी लगे अब
बेवक़्त उनका ख़याल दिल में हुज़ूर है |

इबादात करते है सौ बार दिन में
पाकजज़्बे पर हमे बहुत गरूर है |

नफ़रतॉ के खार दिल से रुखसत हुए सारे
इश्क़ –गुल का हम पर ये असर ज़रूर है |

[4]

खामोशियों से की कई बार कोशिश
बयान करे तुम से अपने मोहोब्बत का अफ़साना
दिलबर हुए हो जब से दिल के सरताज
महफ़िलचमन  हमे लगे और सुहाना
मिल जाते हों राहों में कभी अकेले
दो बातें कर लेते है तुझ से
की है मुश्किलें ज़रासी आसान
तेरा साथ पाने का मिला यही  बहाना. |

[5]

मोहोब्बत के सफ़र में ,कुछ पल रुक जाए
प्यार के महकते गुलाब आज फिर ले आए
चाँदनी ने की है रौशन सारी फ़िज़ाए
आफताब-ए-गवाह को भी संग बुलाए
तुम मेरी साँसों को महसूस करो दुबारा
तेरी धड़कने सुनू मैं,यूही गुज़रे वक़्त सारा
कुछ तुम कहो,कुछ हम कहे,कभी खामोश नज़ारा
पल पल मिलकर सजाए,बहेती जीवन धारा |

HAPPY VALENTINE DAY

 

रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान

रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान
चाँद के बिन सितारे अधूरे  से लगते  है |

समंदर की गहराई में छुपाया जो खजाना
मोतियो  के बिन सीप अधूरे से लगते है |

इज़हार करने जाओ जो गमजमाना
आसुओ के बिन नयन अधूरे से लगते है |

महफ़िल में सजाओ जो गीतो का तराना
सुरताल  के बिन साज़ अधूरे से लगते है |

तुम हमे कितनी अज़ीज़ कैसे करे बयान
महक‘  के  बिन फूल अधूरे से लगते है |

देखिए आप हमे चन्दा ना कहलाये

देखिए आप हमे चन्दा ना कहलाये
ये सुनकर आज कल हमसे पहले
वो आसमान का चाँद ही शरमाये
जो लफ्जे तारीफ आप हमारी करते हो
चाँद उनसे अपना दिल है बहलाए
शाम ढलते तुरंत ही प्रतीक्षा करता
ताकि आप उसे सबसे पहले नज़र आये
इसे जलन कहे या और कुछ पता नही
हम अपने दीवाने मन् को कैसे समझाए
हम इस उलझन में बावरे से फिरते
चाँद आपको हमसे कही दूर न ले जाये .

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साथ में हम भी


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

1.जाम पर जाम छलकते रहे
आँखों में सपने पनपते रहे
मोहोब्बत-ए-महफ़िल सजी
रात भर शमा जलती रही
तेरा आना इंतज़ार बन गया
साथ में जले हम भी |

2.मध्यम सी चाँदनी बिखरी
चाँद आया,ये रात निखरी
आगोश में समा गयी चाँदनी
प्यार के अरमान हुए रौशन
तूने जो छू लिया हमे अब
साथ में बहके हम भी |
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वही पलाश के फूल लाना तुम

वही पलाश के फूल लाना तुम

चले जो कभी लहराती हवाये 
काया को मृदुसी छुकर  जाये
हमारी छुअन का आभास कराये
हमारी याद दिल को सताए
बिन बुलाये पास चले आना तुम
जो हमारे प्यार के गवाह सदा  है
साथ वही पलाश के फूल लाना तुम |

कभी जो बहारों का मौसम आये
रंगो से सारी अवनी सज जाये
हमारी ख़ुशबू का आभास जताए
हमसे मिलन को तरसाए
याद कर हमे यूही मुस्कुराना तुम
जो हमारे साथ महके सदा है
साथ वही पलाश के फूल लाना तुम |

कभी जो पुकारे बेसुद घटाए
प्यार की बुन्दो को बरसाए
हमारी बाहो का आभास कराए
हमारी तन्हाई और बढ़ाए
प्यार की सुरीली मेहफ़ील सजाना तुम
जो हमारे संग गाते सदा है
साथ वही पलाश के फूल लाना तुम |

कभी जो नभ पर चाँद आये
अपनी शीतल चाँदनी बिखराये
हमारे अक्स का आभास कराए
हमे देखने जिया मचल जाये
पलको में अपनी हमे बसाना तुम
जो हमारे साथ रौशन सदा है
साथ वही पलाश के फूल लाना तुम |

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