खुदा-ए-अज़ीज

खुदाअज़ीज तेरे दर पे एक ही बड़ी चादर चढ़ाउँ तो काफ़ी होगी 
वक़्त के साथ तुझसे माँगनेवालों की दुआओं की फेहरिस्त लंबी होगी |

Advertisements

हजीअली -मेरे मौला

हजीअली -मेरे मौला

चादर-ओ -फलक  से कीमती शामियाँ सजाऊँ
पहुंचे तुझ तक इबादत -ऐ -सफर दरमियाँ बनाऊँ |

ज़िंदगी से फलसफे सीखे बहुत मेरे मौला
रूबरू होकर तुझसे जहन की खामियां समझपाऊँ |

दुआएं मेरे अपनों के लिए कबुल कर मालिक
भुलेसे दिल दुखाये कभी हजारों माफियाँ मांगपाऊँ |

हजीअली -ओ -पीर  तेरे सजदे के करम से नवाज़
के वक्त-ऐ-दामन में हुई हमेशा गुस्ताखियाँ बताऊँ |

जहर -ऐ-गुबार मन में पैदा न हो “महक”
हर लब-ओ -गुलिस्ता पे मुस्कानों का आशियाँ बनाऊँ |

फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे

फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे
हर सुबह नज़रों से बिन भूले पिये जा |
फिर भंवरे के जैसी मीठी गुंजन करते
जीवन बगिया में  मद मस्त जिये जा |
कुदर की सुनहरी धूप और गरमाहट
हमेशा ,हर कदम पे महसूस किये जा |
जो प्यार इस धरा से तुम्हे नसीब हुआ
उसके कुछ अंश हर दिल को दिये जा |
ये सारी प्रक्रुति जब प्यार से चहकेगी
जाते हुए उसकी दुआ तू संग लिये जा |

खुदा तेरी खुदाई की कसम तुझे

खुदा तेरी खुदाई की कसम

जूस्तजू है अदब से एक बार
रूबरू करा दे यार से एक बार |

रास्ते में टकराए है उनसे बहुत
निगाहे मिला दे बस एक बार |

उनसे तो हम कत्ल हो चुके
इज़हार-ए-इश्क़ का गुनाह करा दे एक बार |

खुदा तेरी दर का हज कर लिए
यार के दर पर सजदा करू एक बार |

खुदा तेरी खुदाई की कसम तुझे
मेरी दुआ कबुल , कह एक बार |

top post