शृंगार

शृंगार

1.बिंदिया,झुमका,पायल,बाजूबंद मैं सब कुछ पहनकर आउ
   एक काला तीट मुझे लगाना, सब की नज़र से मैं बच पाउ |

2.पिया लुभावन, हर दिन में दुल्हन , चाहे सोला शृंगार करे
   शृंगार उसका अधूरा लागे,जब तक ना सिंदूर से माँग भरे |

3.गोल गोल जो सदा घूमत रहे, मुझे वो ही गरारा चाहिए
   पिया मिलन से मैं शर्माउ,चहेरा छुपाने ओढनी भी लाइए |

4.किन किन करते कंगना मेरे,खनक खनक सब कुछ बोले है
   लाज के मारे लब सिले है , तब कंगना दिल के राज़ खोले है |

5.ठुमक ठुमक जब गोरिया चले है ,उसकी तारीफे कीजिए गा
    रूठे जो सजना से गोरी ,मनाए खातिर, नौलखा दीजिए गा |

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दीदार

दीदार

खुश है मेरी बन्नो,आज मधुचंद्र की रात
सज   कर बैठी है
नही करती किसीसे बात

कुछ भी कहो ,गुलाब सी शरमाए 
पलकों को झुकाए,नयनो से मुस्कुराए

शायद मेरी बन्नो,थोड़ी सी इतराए
पवन के छूअन से भी,थोड़ी सी सहराए 

मुखमंडल पर उसकी,चँदनी का तेज
रंगबिरंगी फूलों से महेकती उसकी सेज

ओढ़ के घूँघट हया का
अपने साजन का करती इंतज़ार

हम भी अब चले यहा से
के बन्ना आया है करने
दुल्हने चाँद का दीदार.

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