भीगे स्पर्श का एहसास

सागर किनारे तक आकर आलिंगन देती ल़हेरे
आते वक़्त भर भरके तुम्हारी यादे समेट लाती है

मेरे मन में उठते हुए  हज़ारों ख़याली तूफ़ानो को
बहुत दूर  कही तो अपने साथ वापस ले जाती है

गीली रेत पर तुम्हारा नाम प्यार से लिखते समय
तुम्हारे भीगे से स्पर्श का एहसास  करा देती है 

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तेरे होने का एहसास

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नींद की लहरों में
ख्वाबों के समंदर से उठ कर

रौशनी की चाह जगाता हुआ

चमचमाती चाँदनी शुभ्रा सा

घुलता है मन के गहराई में

तेरे होने का एहसास

ऑस की बूँदों में
मखमल की पंखुड़ियों पे खिल कर

खुद में ही भिगता हुआ

गुलाब से लम्हो को जीता

मिलता है दिल के साज़ में

तेरे होने का एहसास