यमुना के तट पर

यमुना के तट पर
गोपियों का जमघट
वस्त्राभूषण रख कर
जलक्रीड़ा करती सब.
नटखट कान्हा आए
छुपता दबे पाव तब
देखे गोपिया है मगन
शरारत करने मचला मन
वस्त्राभूषण के साथ
एक पेड़ पर छिप गया
बहोत देर बाद
गोपियों के ध्यान आया
कान्हा को सब पुकारती
वस्त्राभूषण वापस दो कहती
हम सब बाहर कैसे आएँगी
नंदनवन वापस कैसे जाएँगी
कान्हा बोले मैं मान जाउ
पर अपनी एक शर्त मनाउ
यशोदा मैय्या से शिकायत ना करना
चाहे जितना मैं माखन चुराउ
मंज़ूर कह गोपिया शरमाई
नन्हा कान्हा,पर धूम मचाई.

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resham dor

हम सब बंधे हुए है
एक न दिखाई देनेवाले छोर से

हम महसूस करते है,मानते है
आत्मा में उनका निवास है

सुख हो या दुख
मन में कोलाहल हो या शांति

सदा हमारे संग चले
राह दिखाए भटके गर हम
आपने निर्मल व्यवहार से

करुणा उनकी अगाध है
सेवा भाव गर निस्वार्थ है

उनकी भक्ति में हो जायें विभोर
बधा रहे हमारा बंधन उनसे
जब तक है जीवन की रेशम डोर